रामनगर में आयोजित मजलिस में कर्बला के शहीदों को किया गया याद, नौहाख्वानी और सीनाज़नी के बीच नम आंखों से अदा की गई ज़ियारत
रिपोर्ट: विवेक राय
रामनगर (वाराणसी)। इमाम हुसैन की चार वर्षीय पुत्री हज़रत बीबी सकीना की शहादत की याद में रामनगर के वारीगढ़ही स्थित अज़ाखाना-ए-बाबुल हवाएज (शमीम अख्तर के आवास) पर बुधवार को श्रद्धा और अकीदत के साथ मजलिस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अज़ादारों ने सहभागिता कर कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की।
मजलिस की शुरुआत आज़म रिज़वी ने तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक से की, जबकि औसाफ मुर्तुज़ा ने सोज़ख़्वानी प्रस्तुत की। इसके बाद कई शायरों ने अपने मार्मिक कलाम पेश कर माहौल को गमगीन बना दिया।
मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना सैय्यद नदीम असगर बनारसी ने कर्बला की घटना का विस्तार से वर्णन करते हुए इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की महान कुर्बानी पर प्रकाश डाला। उनके भावपूर्ण बयान को सुनकर उपस्थित अज़ादार भावुक हो उठे और पूरा वातावरण गम और अकीदत से भर गया।
मजलिस के उपरांत बीबी सकीना का ताबूत, जनाब-ए-अली असगर का झूला तथा हज़रत अब्बास का अलम बरामद किया गया। अज़ादारों ने नम आंखों से ज़ियारत की और मुहाफ़िज़-ए-अज़ा रामनगर की ओर से नौहाख्वानी एवं सीनाज़नी कर शहीदाने कर्बला को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम के अंत में बानी-ए-प्रोग्राम शमीम अख्तर गदीरी एवं अता अब्बास ने सभी अज़ादारों एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सैय्यद अख्तर रज़ा आब्दी, समर अब्बास, मोहम्मद मेहंदी, मौलाना तहज़ीबुल हसन अज़मी, मुन्ना मिर्ज़ा, यूसुफ़ रिज़वी, ज़हीर हसन जैदी, समीर हसन, ऋषभ हसन, अरमान, कुमैल, इरफ़ान हुसैन, नदीम आब्दी, करनैन, आज़म रिज़वी, नकी हसन विक्की, शबीब हैदर सहित सैकड़ों अज़ादार उपस्थित रहे।




