राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली, शिक्षा की गुणवत्ता, छात्रावास व्यवस्था एवं उच्च शिक्षा परिषद के पुनर्गठन सहित कई अहम मुद्दे उठाए
रिपोर्ट: विवेक राय
वाराणसी। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं विभिन्न राज्य विश्वविद्यालयों के कार्य परिषद सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल ने माननीया राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति के निर्देश पर उनके विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) अशोक देसाई को उच्च शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार संबंधी मांगों का विस्तृत ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व महासंघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय, आज़मगढ़ के कार्य परिषद सदस्य डॉ. जगदीश सिंह दीक्षित ने किया।
प्रतिनिधिमंडल ने वाराणसी स्थित सर्किट हाउस में आयोजित बैठक में विश्वविद्यालयों की कार्य परिषद बैठकों की सूचना एवं एजेंडा समय पर उपलब्ध न कराए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की। साथ ही अधिकांश विश्वविद्यालयों में वर्षों से स्थायी शिक्षकों की नियुक्तियां न होने तथा अतिथि प्रवक्ताओं के भरोसे शैक्षणिक व्यवस्था संचालित किए जाने को शिक्षा की गुणवत्ता के लिए गंभीर चुनौती बताया।
डॉ. जगदीश सिंह दीक्षित ने कहा कि प्रदेश के कई नवस्थापित राज्य विश्वविद्यालयों में नियमित शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। उन्होंने मांग की कि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शीघ्र स्थायी नियुक्तियां की जाएं तथा उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा परिषद का पुनर्गठन कर शिक्षकों के ‘सरस्वती शिक्षा श्री सम्मान’ की प्रक्रिया पुनः प्रारंभ की जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालयों की आय बढ़ाने, छात्रावासों में भोजन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा शैक्षणिक संस्थानों में कोऑपरेटिव सिस्टम, गोशाला एवं मुर्गी पालन इकाइयों की स्थापना जैसे व्यावहारिक सुझाव भी प्रस्तुत किए। डॉ. दीक्षित ने इस संदर्भ में उदय प्रताप स्वायत्तशासी महाविद्यालय, वाराणसी के मॉडल का उल्लेख करते हुए विस्तृत जानकारी दी।
बैठक के दौरान कुलाधिपति की ओर से प्रतिनिधिमंडल को निर्देश दिया गया कि कार्य परिषद सदस्य समय-समय पर अपने-अपने विश्वविद्यालयों का निरीक्षण करें, विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों से संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं का अध्ययन करें तथा सुधार संबंधी सुझाव लिखित रूप से उपलब्ध कराएं।
इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल में प्रो. अरविंद कुमार सिंह, प्रो. अंजू सिंह, प्रो. रश्मि सिंह, प्रो. नलिन कुमार मिश्र एवं प्रो. बीरेन्द्र कुमार निर्मल सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। बैठक में विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।




