स्वामी योगानंद आश्रम में शतचंडी महायज्ञ के समापन पर गुरु गद्दी पूजन, डॉ. नरेन्द्र नाथ व्यास ने गुरु के महत्व पर दिया प्रेरक संदेश
रिपोर्ट: विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
प्रयागराज। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रयागराज के झूंसी स्थित स्वामी योगानंद आश्रम में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच गुरु पूर्णिमा महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। शतचंडी महायज्ञ के सफल समापन के उपरांत आयोजित इस समारोह में गुरु गद्दी पूजन किया गया तथा हजारों श्रद्धालुओं ने अपने गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर डॉ. नरेन्द्र नाथ व्यास ने कहा कि गुरु पूर्णिमा का पर्व भारतीय संस्कृति की गुरु-शिष्य परंपरा को समर्पित है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन चारों वेदों एवं पुराणों के रचयिता महर्षि वेदव्यास का अवतरण हुआ था, इसलिए उन्हें प्रथम गुरु के रूप में सम्मानित किया जाता है। उन्होंने कहा कि ‘गु’ का अर्थ अंधकार और ‘रु’ का अर्थ उस अंधकार को दूर करने वाला है। गुरु ही मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाकर जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति, संस्कार और ज्ञान का महापर्व है। इस दिन शिष्य अपने आध्यात्मिक गुरु, शिक्षकों एवं मार्गदर्शकों का सम्मान करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और जीवन में उनके आदर्शों का अनुसरण करने का संकल्प लेते हैं।
समारोह में स्वामी चिद्घनानंद गिरि जी महाराज, नरेन्द्र भाई, जयप्रकाश मिश्रा, पंकज सिंह, डॉ. आदिनाथ, मां गंगा सेवा समिति के सचिव रंजन शर्मा, नमामि गंगे के संयोजक राजेश शर्मा, प्रमोद यादव सहित अनेक संत, तीर्थपुरोहित, केवट समाज के प्रतिनिधि एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं एवं शिष्यों ने प्रसाद ग्रहण कर गुरु पूर्णिमा महोत्सव को श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न किया।






