पूज्य श्री रतन वशिष्ठ जी महाराज के दिव्य सानिध्य में हजारों श्रद्धालुओं ने किया गुरु पूजन, सुंदरकांड, भजन संध्या और विशाल महाप्रसाद भंडारे में उमड़ी श्रद्धा
रिपोर्ट: विवेक राय
वाराणसी। धर्मनगरी काशी के श्री वन शक्ति देवी धाम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण में अत्यंत भव्यता के साथ संपन्न हुआ। सनातन संघ के संस्थापक एवं पूज्य श्री रतन वशिष्ठ जी महाराज के दिव्य सानिध्य में आयोजित इस महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु, शिष्य एवं भक्तजन शामिल हुए और गुरु चरणों में नमन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
प्रातःकाल से ही धाम परिसर वैदिक मंत्रोच्चार, गुरु वंदना एवं जयघोष से भक्तिमय हो उठा। कार्यक्रम का शुभारंभ पूज्य गुरुदेव के विधिवत गुरु पूजन एवं आरती के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने श्रद्धाभाव से गुरु चरणों में पुष्प अर्पित कर जीवन को धर्म, सेवा और संस्कार के मार्ग पर अग्रसर करने का संकल्प लिया। गुरु दर्शन के लिए दिनभर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।
अपने प्रेरणादायी आशीर्वचनों में पूज्य श्री रतन वशिष्ठ जी महाराज ने गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु ही मनुष्य के जीवन को सही दिशा, आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मिक शांति प्रदान करते हैं। उन्होंने सत्संग, सेवा और सनातन संस्कृति के आदर्शों को आत्मसात कर समाज और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संदेश दिया।
गुरु पूजन के उपरांत आयोजित संगीतमय सुंदरकांड पाठ एवं भजन संध्या ने पूरे वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। व्यासपीठ से गूंजती चौपाइयों और मधुर भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर प्रभु भक्ति में लीन दिखाई दिए। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ कार्यक्रमों में सहभागिता कर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया।
संध्या आरती के पश्चात आयोजित विशाल महाप्रसाद भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने अनुशासित एवं श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया। धाम समिति द्वारा जलपान, विश्राम, महाप्रसाद वितरण एवं अन्य व्यवस्थाओं की उत्कृष्ट व्यवस्था की सभी श्रद्धालुओं ने सराहना की।
दिनभर चले इस आध्यात्मिक महोत्सव में धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से सनातन संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा की गौरवशाली विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के समापन पर धाम समिति ने सभी श्रद्धालुओं, शिष्यों एवं सेवादारों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके सहयोग को आयोजन की सफलता का आधार बताया। गुरु पूर्णिमा महोत्सव ने एक बार फिर श्री वन शक्ति देवी धाम, काशी को श्रद्धा, सेवा और सनातन संस्कृति के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र के रूप में स्थापित किया।




