खर-दूषण वध और राम विलाप के दृश्यों ने दर्शकों को किया भावुक, कलाकारों के जीवंत अभिनय ने बांधा समां
रिपोर्ट: विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
चौबेपुर (वाराणसी)। स्थानीय बाजार में आयोजित 145 वर्ष पुरानी चौबेपुर रामलीला में गुरुवार की रात भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की वंदना एवं आरती के साथ मंचन का शुभारंभ हुआ। इस दौरान सूर्पनखा नासिका छेदन, खर-दूषण वध, सीता हरण और राम विलाप की लीलाओं का सजीव मंचन किया गया। कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। रामलीला समिति के मीडिया प्रभारी राहुल सेठ ने बताया कि रात नौ बजे मंच पर पंचवटी प्रसंग का मंचन शुरू हुआ। भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के रूप-सौंदर्य से मोहित सूर्पनखा ने उनसे विवाह का प्रस्ताव रखा।
लक्ष्मण द्वारा प्रस्ताव ठुकराए जाने पर सूर्पनखा आक्रोशित हो गई, जिसके बाद लक्ष्मण ने उसकी नाक काट दी। अपमानित सूर्पनखा अपने भाइयों खर-दूषण और राक्षसी सेना के साथ पंचवटी पहुंची, जहां भगवान श्रीराम ने युद्ध के दौरान खर-दूषण सहित राक्षसों का वध कर दिया। इसके बाद सूर्पनखा ने लंका पहुंचकर रावण को पूरी घटना बताई और बदला लेने के लिए उकसाया। रावण ने मारीच की सहायता से स्वर्ण मृग की मायावी योजना बनाई। स्वर्ण मृग को देखकर माता सीता ने भगवान श्रीराम से उसे लाने का आग्रह किया।
श्रीराम के मृग के पीछे जाने और लक्ष्मण के भी आश्रम से बाहर निकलने के बाद रावण साधु का वेश धारण कर वहां पहुंचा और माता सीता का हरण कर लिया। सीता के हरण के बाद माता की खोज में व्याकुल भगवान श्रीराम के विलाप का दृश्य देखकर दर्शक भावुक हो उठे। राम की भूमिका देव चतुर्वेदी, लक्ष्मण की आदर्श चौबे, सूर्पनखा की श्याम मोहन गुप्ता, खर की विजय सेठ, दूषण की राजेश सेठ बबलू और रावण की भूमिका गणेशू सेठ ने निभाई। वहीं, सुंदरी का अभिनय पप्पू गुप्ता और सेनापति का अभिनय जयप्रकाश मोदनवाल ने किया।
कार्यक्रम के दौरान रामलीला समिति के संरक्षक कालिका प्रसाद एडवोकेट, दिलीप सेठ, अश्वनी कुमार चौबे उर्फ कंचन, प्रदीप सेठ राजू सोनी, अजय गुप्ता अकेला, प्रेमचंद्र सेठ, कटरू सेठ, बबलू सेठ और मयंक गुप्ता सहित बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे। समिति के अध्यक्ष श्याम मोहन गुप्ता उर्फ बबलू ने आयोजन की व्यवस्था संभाली, जबकि अजय जायसवाल ने आकर्षक श्रृंगार के माध्यम से रामलीला के पात्रों को सजीव रूप प्रदान किया।




