बाली ने मरणासन्न अवस्था में भगवान श्रीराम से पूछा—“मैं बैरी सुग्रीव पिआरा, अवगुन कवन नाथ मोहि मारा”
रिपोर्ट: विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
चौबेपुर (वाराणसी)। श्रीरामलीला समिति चौबेपुर की ओर से आयोजित रामलीला में शुक्रवार की रात भगवान श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता, बाली वध तथा शबरी प्रसंग का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने सजीव अभिनय से दर्शकों को रामकथा के विभिन्न प्रसंगों से भावविभोर कर दिया। मंचन के दौरान सोने के मृग के प्रसंग के बाद भगवान श्रीराम और लक्ष्मण पंचवटी लौटते हैं, जहां रावण द्वारा माता सीता का हरण किए जाने की जानकारी मिलने पर श्रीराम व्याकुल होकर उनकी खोज में निकल पड़ते हैं।
सीता की तलाश करते हुए वे शबरी की कुटिया पहुंचते हैं, जहां शबरी प्रेमपूर्वक उन्हें अपने जूठे बेर खिलाती हैं। इसके बाद भगवान श्रीराम की हनुमान और सुग्रीव से भेंट होती है और सुग्रीव से उनकी मित्रता हो जाती है। सुग्रीव अपने बड़े भाई बाली द्वारा किए गए अत्याचारों की जानकारी भगवान श्रीराम को देते हैं।
इसके बाद श्रीराम की सलाह पर सुग्रीव बाली को गदा युद्ध के लिए ललकारते हैं। पहले युद्ध में सुग्रीव को हार का सामना करना पड़ता है और वे वापस लौट आते हैं। इसके बाद भगवान श्रीराम सुग्रीव को पहचान के लिए माला पहनाकर दोबारा युद्ध करने भेजते हैं। दूसरी बार युद्ध के दौरान भगवान श्रीराम पेड़ की आड़ से बाली का वध कर देते हैं। मरणासन्न अवस्था में बाली भगवान श्रीराम से प्रश्न करते हैं—“मैं बैरी सुग्रीव पिआरा, अवगुन कवन नाथ मोहि मारा।” इस प्रसंग का मंचन देखकर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के जयकारे लगाए।
रामलीला में बाली और सुग्रीव के युद्ध का दृश्य दर्शकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। आयोजन को देखने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिला और पुरुष पहुंच रहे हैं। बाली की भूमिका गणेशु सेठ ने तथा सुग्रीव की भूमिका विजय सेठ उर्फ पिंटू ने निभाई। इस अवसर पर रामलीला समिति के अध्यक्ष श्याम मोहन गुप्ता उर्फ बबलू सहित समिति के सभी सदस्य मौजूद रहे। रामलीला समिति के मीडिया प्रभारी राहुल सेठ ने उक्त जानकारी दी।




