पीड़ितों ने पुलिस पर तहरीर बदलने का दबाव बनाने का लगाया आरोप, मुकदमा दर्ज न होने से नाराजगी; थानाध्यक्ष बोले—किसी पक्ष से नहीं मिली तहरीर
रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
वाराणसी। कपसेठी थाना क्षेत्र के महाराजपुर गांव के माधोपुर में जमीन पर निर्माण को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद मारपीट में बदल गया। घटना में पांच लोग घायल हो गए। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि हमलावरों ने कुल्हाड़ी और लोहे की रॉड से हमला किया। वहीं, घटना के तीन दिन बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं होने और मेडिकल परीक्षण में देरी को लेकर पीड़ितों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, कपसेठी थानाध्यक्ष विकास मौर्य ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई थी, लेकिन किसी भी पक्ष की ओर से तहरीर नहीं दी गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, महाराजपुर ग्राम पंचायत के माधोपुर निवासी रघुवीर राजभर रविवार की रात अपने बाथरूम की दीवार का निर्माण करवा रहे थे। इसी दौरान पड़ोसी जिलेदार सिंह, शांतनु सिंह, शांत सिंह, ऋषि सिंह सहित कई अन्य लोग मौके पर पहुंच गए। आरोप है कि उन्होंने निर्माण का विरोध करते हुए संबंधित जमीन को अपना बताया। इस पर रघुवीर राजभर और उनके पक्ष के लोगों ने जमीन को अपनी आबादी की भूमि बताते हुए निर्माण कार्य जारी रखने की बात कही।
आरोप है कि इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया और दूसरे पक्ष के लोगों ने रघुवीर राजभर के पक्ष पर कुल्हाड़ी और लोहे की रॉड से हमला कर दिया। मारपीट में अजीत राजभर, जगदीश राजभर, लालमनी राजभर, गीता राजभर और बुजुर्ग महिला हीरावती राजभर घायल हो गईं।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि घटना के बाद पुलिस घायलों को पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सेवापुरी ले गई। वहां से उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हाथी भेजा गया, जहां चिकित्सकों ने जिला अस्पताल पंडित दीनदयाल उपाध्याय के लिए रेफर कर दिया। आरोप है कि अस्पताल ले जाने के बजाय पुलिस घायलों को थाने ले गई और अपनी मर्जी के मुताबिक तहरीर लिखवाने का दबाव बनाने लगी।
घायलों का कहना है कि पुलिस उनसे शिकायत में कुल्हाड़ी और रॉड से हमले का उल्लेख नहीं करने को कह रही थी। पीड़ितों के मुताबिक, उन्होंने पुलिस को स्पष्ट रूप से बताया कि हमलावरों ने इन्हीं हथियारों से मारपीट की थी, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।
पीड़ित पक्ष का यह भी आरोप है कि घटना के तीन दिन बीत जाने के बाद भी न तो उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया और न ही मुकदमा दर्ज किया गया। इससे पीड़ित परिवार के साथ-साथ गांव के लोगों में भी नाराजगी है।
इस मामले में कपसेठी थानाध्यक्ष विकास मौर्य ने बताया कि जमीन विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई थी। उन्होंने कहा कि सभी घायलों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है, लेकिन अब तक किसी भी पक्ष की ओर से तहरीर नहीं मिली है। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया।
फिलहाल, मामले में दोनों पक्षों के आरोपों के बीच शिकायत दर्ज होने और पुलिस की आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।




