बनारस की जोड़ी-गदा परंपरा के संरक्षक को श्रद्धा-सुमन अर्पित, हर्ष सिंह बक्सी बोले— गुरु का सान्निध्य जीवन की सबसे बड़ी पूंजी
रिपोर्ट: विवेक राय
वाराणसी। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर काशी की प्राचीन अखाड़ा परंपरा के गौरव एवं जोड़ी-गदा संस्कृति के संरक्षक आदरणीय घंशू पहलवान जी का श्रद्धापूर्वक पूजन एवं माल्यार्पण कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया गया। इस अवसर पर शिष्यों एवं अखाड़ा प्रेमियों ने गुरु के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करते हुए भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा का सम्मान किया।
कार्यक्रम के दौरान हर्ष सिंह बक्सी ने अपने गुरु घंशू पहलवान जी का अभिनंदन करते हुए कहा कि बनारस की ऐतिहासिक अखाड़ा संस्कृति और जोड़ी-गदा परंपरा को जीवंत बनाए रखने में उनका योगदान अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि ऐसे महान व्यक्तित्व की छत्रछाया और मार्गदर्शन प्राप्त होना उनके लिए गर्व और सौभाग्य की बात है।
हर्ष सिंह बक्सी ने कहा कि गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि अनुशासन, संस्कार, आत्मबल और जीवन के आदर्शों का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं। गुरु का आशीर्वाद शिष्य के जीवन को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान करता है।
इस अवसर पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं एवं शिष्यों ने गुरु चरणों में पुष्प अर्पित कर उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं अखाड़ा परंपरा के निरंतर संरक्षण की कामना की। गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन श्रद्धा, सम्मान और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण बन गया।






