एनएसयूआई ने शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन पर दर्ज मुकदमे को बताया लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन, निष्पक्ष जांच और निर्दोष छात्रों को राहत देने की उठाई मांग
रिपोर्ट: अभिषेक उपाध्याय
भदोही। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के जिलाध्यक्ष शक्ति मिश्र के नेतृत्व में बुधवार को कांग्रेस एवं एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने काशी नरेश विश्वविद्यालय, ज्ञानपुर में छात्र आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज एफआईआर को निष्पक्ष जांच के बाद वापस लेने की मांग की।
ज्ञापन में बताया गया कि 25 जुलाई 2026 को छात्र-छात्राओं ने शिक्षा से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन की पूर्व सूचना प्रशासन को भी दी गई थी, इसके बावजूद छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई, जिसे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया।
एनएसयूआई ने मांग की कि पूरे मामले की सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग एवं अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक निर्दोष छात्रों की गिरफ्तारी एवं किसी भी प्रकार के उत्पीड़न पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा दोषमुक्त पाए जाने पर दर्ज एफआईआर को निरस्त किया जाए।
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सुरेशचंद्र मिश्र ने कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी समस्याओं को उठाना छात्रों का संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक अधिकार है। ऐसे मामलों में दमनात्मक कार्रवाई उचित नहीं है।
एनएसयूआई जिलाध्यक्ष शक्ति मिश्र ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि छात्रों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो कांग्रेस और एनएसयूआई संयुक्त रूप से व्यापक जनआंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस एवं एनएसयूआई के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।





