काशी विश्वनाथ मंदिर में नियमित श्रद्धालुओं और स्थानीय आधार कार्डधारी भक्तों के लिए पृथक कतार की उठी मांग, वर्षों पुरानी व्यवस्था पुनः लागू करने की अपील
रिपोर्ट: विवेक राय
वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में नेमी (नियमित) दर्शनार्थियों एवं स्थानीय आधार कार्डधारी श्रद्धालुओं के लिए पृथक दर्शन व्यवस्था पुनः लागू किए जाने की मांग को लेकर श्रद्धालुओं की आवाज अब शासन स्तर तक पहुंच गई है। कलेक्ट्रेट कचहरी के अधिवक्ता एवं नेमी दर्शनार्थी वाचस्पति मिश्र ने उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि श्री काशी विश्वनाथ धाम देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं, वहीं वर्षों से नियमित रूप से बाबा विश्वनाथ के दर्शन, जलाभिषेक एवं पूजा-अर्चना करने वाले नेमी दर्शनार्थियों की परंपरा भी विशेष महत्व रखती है। पूर्व में उनके लिए अलग दर्शन व्यवस्था संचालित थी, जिससे उनकी दैनिक धार्मिक साधना सुचारु रूप से संपन्न होती थी।
वाचस्पति मिश्र ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में नेमी दर्शनार्थियों और वाराणसी के आधार कार्डधारी स्थानीय श्रद्धालुओं को एक ही कतार में शामिल कर दिया गया है। इससे नियमित श्रद्धालुओं को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे उनकी वर्षों पुरानी पूजा-पद्धति और धार्मिक अनुशासन प्रभावित हो रहा है। साथ ही स्थानीय श्रद्धालुओं को भी अत्यधिक भीड़ और अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि नेमी दर्शनार्थियों के लिए पूर्ववत पृथक प्रवेश द्वार एवं अलग दर्शन कतार तत्काल बहाल की जाए। इसके साथ ही वाराणसी के स्थानीय आधार कार्डधारी श्रद्धालुओं के लिए भी स्वतंत्र दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा भविष्य में दोनों व्यवस्थाओं को एकीकृत न किए जाने के स्पष्ट निर्देश श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद एवं संबंधित अधिकारियों को जारी किए जाएं।
ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रमुख सचिव (धर्मार्थ कार्य विभाग), मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, वाराणसी के सांसद तथा स्थानीय विधायकों को भी प्रेषित की गई है। नेमी दर्शनार्थियों ने उम्मीद जताई है कि श्रद्धालुओं की आस्था, धार्मिक परंपरा और सुचारु भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए सरकार शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर पूर्व व्यवस्था को बहाल करेगी।




