हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद, संतों ने आध्यात्मिक जीवन के महत्व पर दिया प्रेरक संदेश
रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
चौबेपुर (वाराणसी)। धौरहरा-हरिहरपुर में आयोजित शतचंडी महायज्ञ का समापन धार्मिक अनुष्ठानों एवं विशाल भंडारे के साथ श्रद्धा और उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। समापन अवसर पर आयोजित भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम में दूर-दराज़ से आए संत-महात्माओं तथा श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
महायज्ञ के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए श्री-श्री योगी रामानंद दास जी महाराज ने कहा कि मानव जीवन ईश्वर का अमूल्य उपहार है। यदि व्यक्ति जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझ ले, तो उसे परम आनंद और परमात्मा की अनुभूति प्राप्त हो सकती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य भौतिक दौड़-भाग में इतना व्यस्त हो गया है कि वह अपने वास्तविक जीवन-मूल्यों से दूर होता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि केवल धन, पद और भौतिक उपलब्धियाँ ही जीवन की सफलता का मापदंड नहीं हैं। यदि भौतिक समृद्धि के साथ आध्यात्मिक चेतना का भी विकास हो, तभी जीवन संतुलित, सुखी और तनावमुक्त बन सकता है। योग, ध्यान और अध्यात्म ही मानव जीवन को शांति, संतोष एवं आत्मिक उन्नति प्रदान करते हैं।
योगी रामानंद दास जी महाराज ने कहा कि महर्षि पतंजलि के योग दर्शन का मूल उद्देश्य मनुष्य को आत्मिक शांति एवं परमात्मा से जोड़ना है। योग और साधना के माध्यम से जीवन की व्यग्रता, तनाव तथा नकारात्मक प्रवृत्तियों का अंत होता है और व्यक्ति आध्यात्मिक उत्कर्ष की ओर अग्रसर होता है।
कार्यक्रम में श्री संतोष दास जी महाराज, संतोष आचार्य, जगद्गुरु सतगुरु बाबा सतुआ बाबा, श्री गोविंद दास जी महाराज, श्री रामलोचन दास जी महाराज, श्री श्रवण दास जी महाराज, श्री सियाराम दास जी महाराज, श्री भारद्वाज जी महाराज, श्री रामरूप दास जी महाराज, श्री भगवान दास जी महाराज, प्रयागराज से पधारे महंत रामलखन दास जी महाराज, श्री मयंक रामदास जी महाराज, श्री रामचरण दास जी महाराज, श्री मधुसूदन दास जी महाराज, बाबा आशीष दास, स्वामी गोविंदानंद जी, स्वामी प्रेमानंद जी एवं स्वामी मधुसूदनानंद जी सहित अनेक संत-महात्माओं ने सहभागिता की।
इस अवसर पर सैयदराजा विधायक सुशील सिंह, अमित सिंह, सोनूवाले जी, रामअवतार जी सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। महायज्ञ के समापन पर आयोजित विशाल भंडारे में हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर धर्म एवं संस्कृति के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।




