शिक्षण के अनूठे प्रयोग, 34 नए अंग्रेजी माध्यम के दाखिले और 90 फीसदी से अधिक उपस्थिति ने बढ़ाया अभिभावकों का भरोसा
विवेक राय
वाराणसी (चौबेपुर)। चौबेपुर क्षेत्र का प्राथमिक विद्यालय चंद्रावती इन दिनों सरकारी शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की एक प्रेरणादायी तस्वीर पेश कर रहा है। शिक्षिका डॉ. सुमन कुमारी के निरंतर प्रयासों और नवाचार आधारित शिक्षण पद्धति ने विद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को नई पहचान दी है। यही वजह है कि अब यह विद्यालय बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों के आकर्षण का केंद्र बन गया है और निजी विद्यालयों को भी चुनौती देता नजर आ रहा है।
विद्यालय में बच्चों को पढ़ाई के साथ सहभागिता और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाता है। प्रार्थना सभा में प्रतिदिन अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों की सहभागिता सुनिश्चित की जाती है। इसके बाद सुविचार और प्रश्नोत्तर गतिविधि होती है। प्रत्येक कक्षा से एक बच्चा प्रश्न पूछता है और दूसरे बच्चे हाथ उठाकर उसका उत्तर देते हैं। छोटे-छोटे संस्कृत शब्दों और वाक्यों के माध्यम से बच्चों को संस्कृत संभाषण का अभ्यास भी कराया जाता है।
विद्यालय में किए जा रहे प्रयासों का असर नामांकन पर भी दिखाई दे रहा है। इस वर्ष अंग्रेजी माध्यम से पढ़ने वाले 34 बच्चों ने प्राथमिक विद्यालय चंद्रावती में नामांकन कराया। इसे विद्यालय के प्रति अभिभावकों के बढ़ते विश्वास का संकेत माना जा रहा है।
बच्चों की नियमित उपस्थिति बढ़ाने के लिए विद्यालय में ‘बुलावा टोली’ का गठन किया गया है। इन टोलियों के नाम महापुरुषों के नाम पर रखे गए हैं। प्रार्थना सभा में पहुंचे अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, वाराणसी के उपनिदेशक संजय कुमार मिश्रा ने भी इस पहल की सराहना की। विद्यालय के अनुसार, इसका परिणाम यह है कि प्रतिदिन 90 प्रतिशत से अधिक उपस्थिति बनी रहती है।
विद्यालय के इको क्लब के माध्यम से प्लास्टिक मुक्त अभियान भी चलाया जा रहा है। विभिन्न कार्यक्रमों में अब तक सूती कपड़े और जूट से बनी 2000 से अधिक थैलियों का वितरण किया जा चुका है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत बच्चों के जन्मदिन पर उन्हें उपहार के रूप में पौधा दिया जाता है। साथ ही बच्चों को पौधे की देखभाल और संरक्षण की शपथ भी दिलाई जाती है। बेसिक शिक्षा विभाग ने भी इस पहल की सराहना की है।
नवाचार और संस्कृत नवाचार के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए डॉ. सुमन कुमारी को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) की ओर से लगातार तीन वर्षों तक सर्वश्रेष्ठ शिक्षिका का सम्मान मिल चुका है। उन्हें वाराणसी के काशी गौरव सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2025 में उन्हें एडूलीडर्स सम्मान से नवाजा गया, जिसे लखनऊ में प्रमुख सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने प्रदान किया।
विद्यालय के बच्चों को वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री से मिलने का अवसर मिला था। वहीं अक्टूबर माह में बच्चों को सदी के महानायक अमिताभ बच्चन से मिलने का अवसर भी प्राप्त हुआ।
शिक्षा के साथ बच्चों को संगीत से जोड़ने के लिए विद्यालय में वाद्य यंत्रों का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। दिव्यांग बच्चों के लिए शिक्षिका की ओर से विशेष प्रयास किए जाते हैं। उनके ठहराव और सहभागिता को बढ़ाने के लिए विद्यालय में मैत्रीपूर्ण वातावरण तैयार किया गया है। इसके चलते दिव्यांग बच्चे भी विद्यालय की विभिन्न गतिविधियों में रुचि के साथ भाग ले रहे हैं।
खंड शिक्षा अधिकारी नागेंद्र सरोज के अनुसार, प्राथमिक विद्यालय चंद्रावती अब बच्चों के साथ अभिभावकों के आकर्षण का भी केंद्र बन चुका है। विद्यालय सरकारी शिक्षा व्यवस्था के लिए एक प्रेरणादायी मॉडल के रूप में उभर रहा है और निजी विद्यालयों को भी टक्कर दे रहा है। शिक्षिका के निरंतर प्रयासों से विद्यालय में नामांकन बढ़ा है और यह पूरे ब्लॉक में सर्वाधिक नामांकन वाले विद्यालयों की सूची में भी शामिल रहा है।




