अध्यात्म न्याय समिति की ओर से पिशाच मोचन में हुआ वैदिक अनुष्ठान, विश्व कल्याण की कामना
रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
वाराणसी। नेपाल में त्रिशूली नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ की चपेट में आकर रसुवागढ़ी क्षेत्र के निवासियों तथा कैलाश मानसरोवर के तीर्थयात्रियों की असमय मृत्यु पर उनकी सद्गति एवं आत्मशांति के लिए काशी में विशेष त्रिपिंडी श्राद्ध कराया गया। अध्यात्म न्याय समिति के संस्थापक डॉ. राजकुमार मिश्र के मार्गदर्शन में यह धार्मिक अनुष्ठान भाद्रपद कृष्ण अमावस्या के अवसर पर पिशाच मोचन, वाराणसी में सम्पन्न हुआ।
वैदिक परंपरा के अनुसार आयोजित इस त्रिपिंडी श्राद्ध में विभिन्न प्रकार के प्रेतात्माओं की शांति एवं मुक्ति के लिए विधिवत पिंडदान किया गया। अनुष्ठान के दौरान सात्त्विक प्रेतों के लिए जौ का पिंड, राजस प्रेतों के लिए चावल का पिंड तथा तामस प्रेतों के लिए तिल का पिंड अर्पित किया गया। इसके उपरांत भगवान विष्णु, ब्रह्मा एवं रुद्र से प्रार्थना कर दिवंगत आत्माओं की सद्गति और मुक्ति की कामना की गई।
काशी के वैदिक विद्वान के आचार्यत्व में सम्पन्न हुआ अनुष्ठान
त्रिपिंडी श्राद्ध का आयोजन काशी के वैदिक विद्वान डॉ. राजेन्द्र मिश्र के आचार्यत्व में वैदिक विधि-विधान से सम्पन्न हुआ। इस दौरान नेपाल के रसुवागढ़ी, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा एवं तनहूं क्षेत्र में आपदा से प्रभावित दिवंगत लोगों की आत्मशांति के लिए विशेष प्रार्थना की गई।
समिति के अध्यक्ष श्री सत्यनारायण पांडेय ने कहा कि काशी की पवित्र भूमि से दिवंगत आत्माओं की सद्गति के लिए किया गया यह अनुष्ठान विश्व कल्याण की भावना से उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति श्रद्धा और संवेदना व्यक्त करते हुए उनकी आत्मशांति के लिए प्रार्थना करना मानवीय एवं आध्यात्मिक दायित्व है।
कार्यक्रम में समिति के उपाध्यक्ष कृष्ण मोहन पांडेय, कोषाध्यक्ष विजय शंकर मिश्र, सुश्री अर्पिता मिश्रा, वृजेश कुमार पांडेय, दयासागर पाठक, गौरव पांडेय, निमिष मिश्र सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। अनुष्ठान के अंत में दिवंगत आत्माओं की शांति एवं मोक्ष तथा शोक संतप्त परिवारों को धैर्य प्रदान करने की प्रार्थना की गई।




