श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन वामन अवतार का वर्णन, संत दास जी महाराज ने दिया अहंकार त्यागने का संदेश
रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
चौबेपुर (वाराणसी)। चौबेपुर क्षेत्र के सोनबरसा गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। अयोध्या से पधारे कथा व्यास श्री श्री 108 संत दास जी महाराज ने वामन अवतार की कथा सुनाने के साथ भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का भावपूर्ण वर्णन किया। जन्मोत्सव के दौरान भक्त भक्ति गीतों पर झूम उठे और पूरा पंडाल भक्तिमय हो गया।
कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य को आध्यात्मिक शांति मिलती है। कथा की शिक्षाओं को जीवन में अपनाकर व्यक्ति अपने आचरण में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। वामन अवतार का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि भगवान विष्णु ने राजा बलि के माध्यम से अहंकार और दंभ त्यागने की शिक्षा दी। धन-संपत्ति क्षणभंगुर है, इसलिए मनुष्य को परोपकार और सद्कर्मों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अहंकार, घृणा, ईर्ष्या और गर्व से मुक्त होकर ही व्यक्ति ईश्वर के निकट पहुंच सकता है। भगवान के नाम पर विश्वास और भक्ति से जीवन को सही दिशा मिलती है। कथा के दौरान उन्होंने इंद्रियों पर नियंत्रण रखने तथा भगवान के भजन को जीवन का हिस्सा बनाने की प्रेरणा भी दी।
कथा व्यास ने बताया कि पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोवर्धन पूजा और छप्पन भोग की कथा सुनाई जाएगी। इस अवसर पर मुन्नू चौबे, उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, पवन चौबे, राधेश्याम शुक्ला, राजू प्रजापति सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।




