सोनबरसा में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन उमड़ी भक्तों की भीड़, भगवान को अर्पित किया गया छप्पन भोग
रिपोर्ट : वीरेंद्र प्रताप उपाध्याय
चौबेपुर (वाराणसी)। क्षेत्र के सोनबरसा गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा श्रवण के लिए पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। अयोध्या से पधारे कथावाचक संत श्री श्री 108 बाबा संत दास जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक बाल लीलाओं और गोवर्धन लीला का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए।
कथा व्यास बाबा संत दास जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि कंस द्वारा भेजी गई राक्षसी पूतना जब बालकृष्ण को विषपान कराने पहुंची, तो भगवान ने उसका उद्धार कर उसे मोक्ष प्रदान किया। इसके बाद माखन चोरी और माता यशोदा के वात्सल्य प्रेम के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कथा पंडाल में भक्तों ने जयकारों के साथ अपनी श्रद्धा व्यक्त की। पूरा वातावरण ‘हाथी, घोड़ा, पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के उद्घोष से भक्तिमय हो उठा।
कथा के पांचवें दिन का प्रमुख आकर्षण भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला रही। महाराज जी ने बताया कि जब देवराज इंद्र को अपने सामर्थ्य पर अभिमान हो गया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए अपनी कनिष्ठा अंगुली पर विशाल गोवर्धन पर्वत उठा लिया।
भगवान ने अपनी लीला के माध्यम से इंद्र के अहंकार का मर्दन किया और ब्रजवासियों को सुरक्षा प्रदान की। इस प्रसंग के माध्यम से कथावाचक ने श्रद्धालुओं को अहंकार त्यागने, प्रकृति के प्रति सम्मान रखने और ईश्वर पर विश्वास बनाए रखने का संदेश दिया।
गोवर्धन लीला के अवसर पर भगवान गोवर्धन को विधि-विधान के साथ छप्पन भोग अर्पित किया गया। श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक कथा का श्रवण किया और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए।
कार्यक्रम के समापन पर मुख्य यजमानों ने श्रीमद्भागवत महापुराण की महाआरती की। इसके बाद उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया।
इस धार्मिक आयोजन में मुगलसराय के विधायक रमेश जायसवाल, प्रधान संघ अध्यक्ष संजीव सिंह, परमानंद गिरी प्रधान, राघवेंद्र जायसवाल प्रधान, सुनील तिवारी, पापाई तिवारी प्रधान और संजय जयसवार प्रधान सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण कर धर्म, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त की।




