सोनबरसां गांव में सात दिवसीय भागवत ज्ञान यज्ञ का हुआ समापन, भारी बारिश के बावजूद कथा सुनने पहुंचे श्रद्धालु; विशाल भंडारे में हजारों लोगों ने ग्रहण किया महाप्रसाद
रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
चौबेपुर (वाराणसी)। क्षेत्र के सोनबरसां गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का समापन सुदामा चरित्र एवं राजा परीक्षित मोक्ष के भावपूर्ण प्रसंगों के साथ हुआ। कथा के सातवें और अंतिम दिन अर्नब तूफान एवं भारी बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था कम नहीं हुई और बड़ी संख्या में लोगों ने कथा का श्रवण किया। अयोध्या से पधारे संत श्री श्री 108 संत दास जी महाराज ने कथा व्यास के रूप में भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा की निस्वार्थ मित्रता का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सच्ची मित्रता में ऊंच-नीच, अमीरी-गरीबी का कोई स्थान नहीं होता।
सच्चा मित्र वही है, जो बिना कहे अपने मित्र के दुख-दर्द को समझकर उसे दूर करने का प्रयास करे। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के मिलन का प्रसंग सुनकर पंडाल में मौजूद अनेक श्रद्धालु भावुक हो उठे। इसके बाद राजा परीक्षित के मोक्ष तथा सुखदेव जी के विदाई प्रसंग के साथ सात दिवसीय भागवत कथा को विधिवत विराम दिया गया। कथा समापन के उपरांत मुख्य यजमान परिवार ने विधि-विधान से हवन-पूजन कर यज्ञ की पूर्णाहुति की।
इसके बाद आयोजित विशाल भंडारे में भारी बारिश के बावजूद दोपहर से देर शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। आसपास के गांवों एवं क्षेत्रों से पहुंचे हजारों महिला, पुरुष और बच्चों ने पंक्तिबद्ध होकर महाप्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम के आयोजक पवन चौबे ने आयोजन में शामिल हुए सभी संतों, श्रद्धालुओं एवं आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।




