विश्वविद्यालय परिसर में निकाली गई प्रकृति भ्रमण यात्रा, विशेषज्ञों ने बताई वृक्षों की पर्यावरणीय, ऐतिहासिक और पारिस्थितिक महत्ता
रिपोर्ट विवेक राय
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के हरे-भरे परिसर में रविवार, 1 नवंबर 2026 को पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से ‘वॉक एंड टॉक विद ट्रीज़’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस विशेष पहल के तहत विद्यार्थियों, शोधार्थियों और प्रकृति प्रेमियों ने विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद विभिन्न प्रजातियों के वृक्षों का भ्रमण कर उनके पर्यावरणीय, ऐतिहासिक एवं पारिस्थितिक महत्व की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 7 बजे विश्वनाथ मंदिर के प्रवेश द्वार से हुआ। यहां से प्रतिभागियों ने बॉटनिकल गार्डन, आईईएसडी और स्वतंत्रता भवन होते हुए सेंट्रल नर्सरी तक प्रकृति भ्रमण किया। इस दौरान विशेषज्ञों ने विभिन्न वृक्षों की विशेषताओं, जैव विविधता को बनाए रखने में उनकी भूमिका और पर्यावरण संतुलन के लिए उनके योगदान पर विस्तार से जानकारी दी।
आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल वृक्षों की पहचान कराना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को प्रकृति के करीब लाना और पेड़ों के संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करना भी है। बीएचयू की समृद्ध हरित विरासत को समझने की दिशा में यह आयोजन एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
इस अवसर पर सृजन सामाजिक संस्था के अध्यक्ष अनिल सिंह ने कहा कि बीएचयू परिसर में मियावाकी पद्धति से पौधरोपण और प्रकृति संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय परिसर के प्रमुख रास्तों और स्थलों की पहचान वहां मौजूद विशिष्ट वृक्षों के नाम से भी की जानी चाहिए। इससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को परिसर के विभिन्न स्थानों की जानकारी मिलने के साथ वृक्षों के महत्व को समझने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि वृक्षों के नाम से मार्गों और प्रमुख स्थलों की पहचान होने पर विश्वविद्यालय की प्राकृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी। इससे लोगों में पेड़ों के प्रति जुड़ाव और संरक्षण की भावना भी मजबूत होगी। विशेष रूप से पहली बार बीएचयू आने वाले लोगों के लिए यह पहल उपयोगी साबित हो सकती है।
कार्यक्रम का आयोजन बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की हॉर्टिकल्चरिस्ट यूनिट की ओर से किया गया। इसमें सृजन संस्था एवं धारिणी संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर सरफराज आलम, इंचार्ज अश्विनी, प्रकाशानंद, मनोज कुमार, मदन चौरसिया और धर्मेंद्र पटेल सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि प्रत्येक पेड़ केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि अपने भीतर एक इतिहास और पर्यावरणीय महत्व समेटे हुए है। ऐसे आयोजन समाज को प्रकृति से जोड़ने, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
संदेश: हर पेड़ की अपनी एक कहानी है, आइए उसे जानें और अपनी प्राकृतिक विरासत को संरक्षित करें।




