काशी से राहुल गांधी और ममता बनर्जी पर साधा निशाना, बोले- घुसपैठियों को मतदाता बनाने की अनुमति नहीं
रिपोर्ट विवेक राय
वाराणसी । भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सांसद संबित पात्रा ने एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) को लेकर विपक्ष के आरोपों पर तीखा पलटवार किया। सोमवार को वाराणसी के सर्किट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि एसआईआर वोट चोरी नहीं, बल्कि मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने की संवैधानिक प्रक्रिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि घुसपैठियों को मतदाता बनाने की किसी को इजाजत नहीं दी जा सकती।
संबित पात्रा ने राहुल गांधी के चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों को राजनीतिक हताशा करार देते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी चुनावी हार का ठीकरा कभी ईवीएम तो कभी चुनाव आयोग पर फोड़ती रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मतदाता सूची में गड़बड़ी के कारण कांग्रेस चुनाव हार रही है तो वर्ष 2014 से 2025 के बीच उसे 56 विधानसभा चुनावों में हार का सामना क्यों करना पड़ा? पार्टी को अपनी राजनीतिक कमजोरियों पर आत्ममंथन करना चाहिए।
एसआईआर को भाजपा सरकार की नई पहल बताने पर संबित पात्रा ने कहा कि देश में अब तक 12 बार विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया अपनाई जा चुकी है। इनमें 10 बार कांग्रेस शासनकाल और दो बार भाजपा शासनकाल में यह प्रक्रिया हुई। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृतक और दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं के नाम हटाना इस प्रक्रिया का हिस्सा है।
उन्होंने बताया कि एएसडीडी (ASDD) के तहत अनुपस्थित (Absent), स्थानांतरित (Shifted), मृतक (Death) और डुप्लीकेट (Duplicate) मतदाताओं की पहचान की जाती है। उन्होंने दावा किया कि करीब तीन करोड़ लोग अनुपस्थित श्रेणी में चिह्नित हुए, छह करोड़ लोगों ने फॉर्म-6 के माध्यम से नाम जुड़वाने की प्रक्रिया अपनाई और छह करोड़ स्थानांतरित मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए। उनके मुताबिक, इन आंकड़ों को जोड़कर 13 करोड़ वोट चोरी का आरोप लगाना भ्रामक है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि देश के लोकतंत्र और संसाधनों पर पहला अधिकार भारतीय नागरिकों का है। घुसपैठियों को मतदाता सूची में शामिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। एसआईआर का उद्देश्य पात्र नागरिकों के नाम सुरक्षित रखना और अपात्र नामों को हटाना है।
उन्होंने पश्चिम बंगाल की 20 विधानसभा सीटों का उदाहरण देते हुए दावा किया कि जिन क्षेत्रों में सर्वाधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए, उनमें से अधिकांश सीटों पर तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की। ऐसे में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के जरिए भाजपा को चुनावी लाभ पहुंचाने के आरोपों पर भी उन्होंने सवाल उठाए।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राहुल गांधी के आरोपों पर संबित पात्रा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने से पहले ही भाजपा वर्ष 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव जीत चुकी थी। उन्होंने बताया कि ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभाला था।
उन्होंने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय वीएस संपत मुख्य चुनाव आयुक्त थे, जिनकी नियुक्ति कांग्रेस शासनकाल में हुई थी। इसके बावजूद भाजपा ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत हासिल किया था। पात्रा ने सवाल किया कि क्या उस समय कांग्रेस ने चुनाव आयोग को भाजपा की जीत सुनिश्चित करने के लिए नियुक्त किया था? उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर बिना ठोस आधार के आरोप लगाना उचित नहीं है।
कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए संबित पात्रा ने कहा कि तमिलनाडु में 59 वर्षों, पश्चिम बंगाल में 49 वर्षों, उत्तर प्रदेश में 37 वर्षों, बिहार में 36 वर्षों, त्रिपुरा में 33 वर्षों और ओडिशा में 26 वर्षों से कांग्रेस सत्ता से बाहर है। उन्होंने सवाल किया कि इन राज्यों में कांग्रेस की हार के लिए भी क्या एसआईआर को जिम्मेदार ठहराया जाएगा?
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी संगठनात्मक और राजनीतिक कमजोरियों का विश्लेषण करना चाहिए, न कि हर हार के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराना चाहिए।
एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की ओर से दाखिल हलफनामे और न्यायिक कार्यवाही का हवाला देते हुए पात्रा ने कहा कि फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। केवल घोषणा पत्र के माध्यम से वर्ष 2002 से 2004 के बीच मतदाता सूची में नाम दर्ज होने से संबंधित जानकारी मांगी गई है।
उन्होंने दावा किया कि जून 2025 से अब तक 18 से 28 वर्ष आयु वर्ग के करीब 2.37 करोड़ युवाओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े गए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि एसआईआर के माध्यम से नए मतदाताओं को बाहर करने का आरोप सही नहीं है।
भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को बूथ स्तर पर सक्रिय होने की सलाह देते हुए कहा कि सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को बूथ लेवल एजेंट नियुक्त करने का अधिकार है। यदि मतदाता सूची में कोई गलत नाम शामिल है या किसी पात्र मतदाता का नाम छूटा है तो संबंधित एजेंट इसकी शिकायत कर सकते हैं। केवल राजनीतिक आरोप लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और उनकी निष्पक्षता को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर भी सवाल उठाए। कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।
पत्रकार वार्ता में भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष अशोक चौरसिया, महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि, जिलाध्यक्ष रामसकल पटेल, क्षेत्र उपाध्यक्ष नवरतन राठी, मधुकर चित्रांश, संतोष सोलापुरकर, शैलेन्द्र मिश्रा, अमित राय, विपिन सिंह, प्रमील पांडेय और अभिषेक त्रिपाठी सहित अन्य भाजपा पदाधिकारी मौजूद रहे।




