बाजार आधारित खेती पर जोर, वैज्ञानिक तकनीक और गुणवत्तापूर्ण पौधों से मिलेगा लाभ
वाराणसी। किसानों की आय में स्थायी वृद्धि और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार के उद्देश्य से Banaras Hindu University (बीएचयू) और चोलापुर कल्याण फार्मर्स प्रोड्यूसर्स कंपनी लिमिटेड (एफपीओ) के बीच महत्वपूर्ण समझौता किया गया। इस पहल के तहत किसानों को बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन, उन्नत खेती के तरीके और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
कार्यक्रम में बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित चतुर्वेदी ने कहा कि कृषि में सफलता केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि बाजार की जरूरतों को समझकर उसी अनुरूप फसल उगाना आवश्यक है। उन्होंने वैज्ञानिकों और किसानों के समन्वय से टिकाऊ आय के स्रोत विकसित करने पर बल दिया।

समझौते के तहत किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, सटीक बागवानी, संरक्षित खेती, उन्नत सिंचाई प्रणाली और डिजिटल कृषि प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही, किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से तैयार किए गए गुणवत्तापूर्ण एवं हेल्दी पौधे नर्सरी के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे।
बैठक में पूर्वांचल की पारंपरिक फल प्रजातियों जैसे बनारसी नींबू, लंगड़ा आम, मुसम्मी, बारहमासी कटहल और शरीफा के संरक्षण एवं संवर्धन पर भी जोर दिया गया। इन प्रजातियों के पौध तैयार कर किसानों को उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है।
इस पहल के अंतर्गत एकीकृत कृषि प्रणाली को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिसमें खेती के साथ पशुपालन, मधुमक्खी पालन सहित अन्य गतिविधियों को जोड़ा जाएगा। इससे किसानों के लिए आय के कई स्रोत विकसित होंगे और जोखिम भी कम होगा।
इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के छात्रों की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है, जिससे उन्हें व्यावहारिक ज्ञान मिलेगा और किसानों तक नई तकनीकों का सीधा लाभ पहुंचेगा।
बीएचयू और एफपीओ के बीच हुआ यह समझौता पांच वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुल सचिव प्रो. अरुण कुमार सिंह, कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. यू.पी. सिंह सहित कई वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान और कृषि विशेषज्ञ मौजूद रहे।
यह पहल उत्तर प्रदेश के किसानों को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।




