आषाढ़ी अमावस्या पर उमड़ा आस्था का सैलाब, मंगला आरती के साथ शुरू हुआ दर्शन-पूजन, जय जगन्नाथ के जयघोष से गूंजा असि क्षेत्र
रिपोर्ट : विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
SHREE 7 NEWS, वाराणसी। काशी के असि स्थित प्राचीन भगवान जगन्नाथ मंदिर में मंगलवार को एक पखवाड़े के अज्ञातवास एवं विश्राम के बाद भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा ने श्रद्धालुओं को पुनः दर्शन दिए। प्रातः पांच बजे मंगला आरती के साथ मंदिर के कपाट खुलते ही दर्शन-पूजन का शुभारंभ हुआ और मंदिर परिसर “जय जगन्नाथ” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए कतारबद्ध रहे।
धार्मिक मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा के स्नानोत्सव के बाद भगवान का महाअभिषेक किया जाता है। अत्यधिक स्नान के कारण भगवान के अस्वस्थ होने की परंपरागत मान्यता के चलते मंदिर के कपाट लगभग पंद्रह दिनों तक बंद रखे जाते हैं, जिसे भगवान के स्वास्थ्य लाभ और विश्राम का काल माना जाता है।
आषाढ़ी अमावस्या के पावन अवसर पर जब मंदिर के पट खुले तो श्वेत वस्त्रों से सुसज्जित भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा के विग्रह बेला, चमेली और तुलसी की सुगंधित मालाओं से अलंकृत दिखाई दिए। तीनों विग्रहों के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने पुष्प, माला, फल एवं मिष्ठान अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की। दर्शन के उपरांत भक्तों ने भगवान को परवल का पथ्य भोग अर्पित किया तथा चरणामृत ग्रहण कर स्वयं को धन्य महसूस किया।
मंदिर के पुजारी राधेश्याम ने बताया कि परंपरा के अनुसार भगवान के विश्राम काल के दौरान मंदिर के कपाट बंद रहते हैं। आषाढ़ कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के बाद आषाढ़ी अमावस्या की प्रातः मंगला आरती के साथ पुनः मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाते हैं। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर धार्मिक परंपरा का लाभ प्राप्त किया।





