जौनपुर के बरसठी क्षेत्र की घटना बनी चर्चा का विषय, बड़ी संख्या में लोग पहुंचे मौके पर; कुछ ने धार्मिक आस्था तो कुछ ने प्राकृतिक कारण बताए
रिपोर्ट : अभिषेक उपाध्याय
जौनपुर (बरसठी)। बरसठी क्षेत्र के चतुर्भुजपुर (बड़का दुबान) से निकुम्हनपुर जाने वाले मार्ग पर स्थित एक विशाल पीपल का पेड़ इन दिनों पूरे इलाके में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार करीब एक माह पहले तेज आंधी में जड़ समेत उखड़कर गिरा यह पेड़ रविवार सुबह अचानक फिर से सीधा खड़ा दिखाई दिया। इस अनोखे दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए।
बताया जाता है कि यह पीपल का वृक्ष पंडित हरिशंकर दुबे के खेत में उनके पिता स्वर्गीय पंडित राम निहोर दुबे द्वारा लगभग 50 वर्ष पूर्व लगाया गया था। 14 मई को आई तेज आंधी में पेड़ जड़ों सहित उखड़कर पास स्थित गिरजा शंकर दुबे के मकान पर गिर गया था। हादसे में मकान का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था और सड़क भी अवरुद्ध हो गई थी। बाद में पेड़ की शाखाएं काटकर मार्ग को आवागमन के लिए खुलवाया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि शनिवार रात तक पेड़ जमीन पर ही पड़ा हुआ था, लेकिन रविवार सुबह लोगों ने देखा कि वही पेड़ जड़ों सहित फिर से खड़ा नजर आ रहा है। इस अप्रत्याशित दृश्य से पूरे क्षेत्र में कौतूहल फैल गया और लोग इसे देखने के लिए मौके पर जुटने लगे।
मकान मालिक गिरजा शंकर दुबे ने बताया कि आंधी के दौरान पेड़ पूरी तरह उखड़कर उनके मकान पर गिरा था। रास्ता साफ कराने के लिए पेड़ के कुछ हिस्से भी कटवाए गए थे। ऐसे में उसी पेड़ का पुनः खड़ा दिखाई देना सभी के लिए आश्चर्य का विषय है।
घटना की सूचना मिलते ही श्री साहिनाथ त्रिपाठी, लवकुश प्रजापति, मुन्ना दुबे, सुगम दुबे सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष मौके पर पहुंचे और इस अनोखे दृश्य को देखा।
ग्रामीणों के बीच इस घटना को लेकर अलग-अलग चर्चाएं हैं। कुछ लोग धार्मिक आस्था के आधार पर इसे चमत्कार मान रहे हैं और पीपल के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास होने की मान्यता से जोड़ रहे हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि इसके पीछे कोई प्राकृतिक या भौतिक कारण भी हो सकता है।
फिलहाल इस घटना की आधिकारिक पुष्टि या वैज्ञानिक कारण सामने नहीं आया है, लेकिन पूरे बरसठी क्षेत्र में यह मामला चर्चा और उत्सुकता का विषय बना हुआ है।





