आचार्य (रामानुजवेदान्त) परीक्षा में सर्वाधिक अंक हासिल कर जीते तीन प्रतिष्ठित स्वर्ण पदक, दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने किया सम्मानित
रिपोर्ट विवेक राय
वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के भव्य दीक्षांत समारोह में हमीरपुर जनपद के कुरारा विकास खंड स्थित हरौलीपुर ग्राम की प्रतिभाशाली छात्रा संगम शुक्ला ने अपनी असाधारण शैक्षणिक उपलब्धि से नया इतिहास रच दिया। आचार्य (रामानुजवेदान्त) परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त कर उन्होंने एक साथ तीन प्रतिष्ठित स्वर्ण पदक अपने नाम किए।
दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल तथा उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती रजनी तिवारी की गरिमामयी उपस्थिति में संगम शुक्ला को सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के इतिहास में अत्यंत गौरवपूर्ण मानी जा रही है।
संगम शुक्ला को उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धि के लिए रामकुंवर बांगड़ स्वर्ण पदक, श्री चन्दन बहिन माधोसिंह परमार स्वर्ण पदक तथा श्री स्वामी माधवाचार्य स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। किसी एक विषय में तीन स्वर्ण पदक अर्जित करना अत्यंत दुर्लभ उपलब्धियों में शामिल माना जाता है।
संगम, श्री राजेश शुक्ला एवं श्रीमती माधुरी शुक्ला की सुपुत्री हैं। उनकी सफलता को वर्षों की कठिन मेहनत, अनुशासित अध्ययन, गुरुजनों के मार्गदर्शन और संस्कृत शिक्षा के प्रति समर्पण का परिणाम बताया जा रहा है।
इस उल्लेखनीय उपलब्धि से हरौलीपुर ग्राम सहित पूरे कुरारा विकास खंड और हमीरपुर जनपद में खुशी का माहौल है। परिजनों, शुभचिंतकों और क्षेत्रवासियों ने संगम को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
क्षेत्र के शिक्षाविदों और प्रबुद्धजनों ने कहा कि संगम शुक्ला की सफलता यह संदेश देती है कि ग्रामीण परिवेश में रहकर भी दृढ़ संकल्प, सतत परिश्रम और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है। उनकी उपलब्धि विशेष रूप से बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत बनने के साथ-साथ संस्कृत शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति नई पीढ़ी का उत्साह भी बढ़ाएगी।




