दीनानाथ भास्कर के सामने जीत की हैट्रिक की चुनौती, 2022 के करीबी मुकाबले ने बढ़ाई सियासी दिलचस्पी
रिपोर्ट: अभिषेक उपाध्याय
भदोही। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक तैयारियां तेज होने के साथ ही भदोही की औराई विधानसभा सीट पर भी सियासी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस सीट पर भाजपा के मौजूदा विधायक दीनानाथ भास्कर के सामने जहां अपनी राजनीतिक पकड़ बरकरार रखने की चुनौती होगी, वहीं विपक्ष 2022 के चुनाव में बने करीबी मुकाबले को आगे बढ़ाने की रणनीति पर नजर रख सकता है।
दीनानाथ भास्कर का औराई की राजनीति में लंबा अनुभव रहा है। उन्होंने 2017 और 2022 में लगातार दो बार भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतकर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। इससे पहले भी वह अलग-अलग राजनीतिक दलों के टिकट पर विधानसभा पहुंच चुके हैं।
2017 में भाजपा ने औराई में बड़ी जीत दर्ज की थी। दीनानाथ भास्कर ने करीब 19,779 वोटों के अंतर से चुनाव जीता था। हालांकि पांच साल बाद 2022 में चुनावी तस्वीर काफी बदल गई।
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। दीनानाथ भास्कर को 93,691 वोट, जबकि सपा की अंजनी को 92,044 वोट मिले। दोनों प्रत्याशियों के बीच जीत का अंतर महज 1,647 वोट रहा।
2017 की बड़ी जीत के मुकाबले 2022 का यह करीबी परिणाम औराई के बदलते चुनावी समीकरणों की ओर इशारा करता है। यही वजह है कि 2027 के चुनाव को लेकर अभी से राजनीतिक विश्लेषण और संभावित समीकरणों पर चर्चा शुरू हो गई है।
पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा को करीब 28 हजार वोट मिले थे। भाजपा और सपा के बीच जीत का अंतर 1,647 वोट रहने के कारण तीसरे दल को मिले मतों को भी चुनावी गणित के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि केवल पिछले आंकड़ों के आधार पर यह तय करना मुश्किल होगा कि बसपा का वोट किसी एक दल के पक्ष में कितना प्रभाव डालेगा। फिर भी 2027 में बसपा का प्रदर्शन और उसका सामाजिक प्रभाव भाजपा-सपा के बीच मुकाबले की दिशा को प्रभावित कर सकता है।
2027 के चुनाव में दीनानाथ भास्कर के सामने अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक पकड़ के साथ-साथ भाजपा के परंपरागत मतदाताओं और संगठनात्मक आधार को मजबूत बनाए रखने की चुनौती होगी। दूसरी ओर विपक्ष के सामने 2022 के करीबी मुकाबले को चुनावी बढ़त में बदलने की चुनौती रहेगी।
औराई में सड़क, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों की समस्याएं और स्थानीय विकास जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में आ सकते हैं। इसके अलावा प्रत्याशियों की व्यक्तिगत छवि, क्षेत्र में सक्रियता और स्थानीय स्तर पर उनकी स्वीकार्यता भी मतदाताओं के रुख को प्रभावित करने वाले कारक हो सकते हैं।
भाजपा ने औराई में लगातार दो चुनाव जरूर जीते हैं, लेकिन 2022 में जीत का अंतर महज 1,647 वोट रह गया था। ऐसे में मौजूदा आंकड़ों के आधार पर इस सीट को पूरी तरह सुरक्षित कहना आसान नहीं होगा।
भाजपा के पास मौजूदा विधायक और संगठन की ताकत है, जबकि विपक्ष के पास 2022 के चुनाव में लगभग बराबरी तक पहुंचने का आंकड़ा मौजूद है। ऐसे में 2027 में मुकाबला किस दिशा में जाएगा, यह उम्मीदवारों, मुद्दों और चुनावी परिस्थितियों पर काफी हद तक निर्भर करेगा।
2022 के करीबी मुकाबले के बाद औराई विधानसभा सीट 2027 में फिर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक रणभूमि बनती नजर आ रही है। अब सवाल यह है कि क्या दीनानाथ भास्कर लगातार तीसरी जीत दर्ज कर हैट्रिक लगाएंगे या विपक्ष इस बार चुनावी समीकरण बदलने में सफल होगा?
2027 का जनादेश ही औराई की अगली राजनीतिक तस्वीर तय करेगा।






