शिव आराधना से गणेश चतुर्थी तक पर्वों की मनोहारी प्रस्तुतियां, कजरी, नृत्य और स्किट ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
रिपोर्ट : विवेक राय
वाराणसी। भारत विकास परिषद ‘काशी’ शाखा की ओर से आयोजित ‘उमंगोत्सव’ में सावन-भादो की लोक परंपराओं, धार्मिक आस्था और भारतीय संस्कृति की रंगीन छटा देखने को मिली। कार्यक्रम में विभिन्न पर्वों को सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से मंच पर जीवंत किया गया। भगवान शिव के जलाभिषेक से शुरू हुई प्रस्तुतियों का क्रम नाग पंचमी, हरियाली तीज, रक्षाबंधन, कजरी, जन्माष्टमी, हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी तक चला। कलाकारों ने प्रत्येक पर्व से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं, सामाजिक भावनाओं और लोक परंपराओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण कजरी रही।
सावन, झूले और सखियों के उल्लास को पारंपरिक लोकगीतों एवं नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत कर कलाकारों ने पूर्वांचल की समृद्ध लोक संस्कृति की मनोहारी झलक दिखाई। हरियाली तीज में हरे परिधानों, झूलों और सखियों के माध्यम से सावन के श्रृंगार को दर्शाया गया, जबकि रक्षाबंधन की प्रस्तुति ने भाई-बहन के स्नेह और पारिवारिक रिश्तों की मिठास का संदेश दिया। जन्माष्टमी में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म एवं बाल लीलाओं को आकर्षक अंदाज में मंचित किया गया।
हरितालिका तीज की प्रस्तुति में माता पार्वती की भगवान शिव को पति रूप में पाने की तपस्या और उनकी अटूट आस्था को प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया गया। गणेश चतुर्थी की प्रस्तुति ने मंगलकामना और गणेश आराधना के भाव को सामने रखा। धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हाउजी गेम, नृत्य और स्किट ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। कलाकारों की प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने तालियों से उत्साहवर्धन किया।
आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ लोक संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और महिला सहभागिता का सुंदर समन्वय देखने को मिला। ‘उमंगोत्सव’ ने यह संदेश दिया कि भारतीय पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और लोक जीवन की जीवंत पहचान भी हैं।
कार्यक्रम का संयोजन अल्पना अग्रवाल, बरखा जैन, रोशनी अग्रवाल, विनीता़ अग्रवाल एवं शालिनी अग्रवाल ने किया। आयोजन को सफल बनाने में अध्यक्ष सौरभ जैन, महिला संयोजिका संगीता रस्तोगी, सचिव डॉ. अमित कुमार सिंह एवं जीवन खन्ना का विशेष सहयोग रहा।




