29 थानों में पुलिस की कार्रवाई और लगातार गिरफ्तारियों के बीच बढ़ती हिंसक घटनाएं बनी चिंता का विषय, रामदयालगंज हत्याकांड ने फिर खड़े किए कानून-व्यवस्था पर सवाल
रिपोर्ट : अभिषेक उपाध्याय
जौनपुर। जिले में अपराध पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस की ओर से लगातार कार्रवाई का दावा किया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक कुंवर अनुपम सिंह के नेतृत्व में जिले के सभी 29 थाना क्षेत्रों में अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है और प्रतिदिन गिरफ्तारियां भी हो रही हैं। इसके बावजूद हत्या और हत्या के प्रयास जैसी गंभीर घटनाएं सामने आना पुलिस की कार्यशैली और अपराध नियंत्रण की प्रभावशीलता को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।
ताजा मामला जिला मुख्यालय से करीब छह-सात किलोमीटर दूर रामदयालगंज बाजार का है, जहां विशाल यादव पर दिनदहाड़े हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल विशाल की उपचार के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद आक्रोशित स्वजन और ग्रामीणों ने सड़क पर शव रखकर विरोध जताया, जिसके चलते मार्ग पर जाम की स्थिति पैदा हो गई। दिनदहाड़े हुई इस घटना ने इलाके की कानून-व्यवस्था को लेकर फिर चर्चा छेड़ दी है।
पिछले कुछ महीनों में जिले में हत्या और हत्या के प्रयास से जुड़े कई मामले सामने आने की बात कही जा रही है। इन घटनाओं ने आम लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। सवाल यह है कि जब पुलिस अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है, तब गंभीर आपराधिक घटनाओं पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लग पा रही है?
प्रदेश में अपराध नियंत्रण के लिए सख्त कार्रवाई, बुलडोजर कार्रवाई और मुठभेड़ जैसी नीतियों को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। इसके बावजूद यदि अपराधी सार्वजनिक स्थानों पर हिंसक वारदातों को अंजाम देने का दुस्साहस कर रहे हैं तो यह पुलिस की निवारक रणनीति पर विचार करने का विषय जरूर है।
हालांकि, किसी जिले में अपराध बढ़ने या घटने का आकलन केवल कुछ घटनाओं के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए अपराध के आंकड़ों, मामलों की प्रकृति, पुलिस की कार्रवाई, आरोपितों की गिरफ्तारी और अदालत में मामलों की स्थिति का समग्र विश्लेषण आवश्यक है।
पुलिस अधीक्षक कुंवर अनुपम सिंह की कार्यशैली और अपराध नियंत्रण को लेकर उठाए जा रहे कदमों पर भरोसा जताते हुए भी यह सवाल अपनी जगह कायम है कि आखिर पुलिस की सख्ती के बावजूद अपराधियों में कानून का भय अपेक्षित स्तर पर क्यों नजर नहीं आ रहा?
क्या पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ अपराध की जड़ तक पहुंचने, पुराने विवादों की निगरानी, संवेदनशील क्षेत्रों में प्रभावी गश्त और संभावित अपराधियों पर समय रहते नजर रखने की रणनीति को और मजबूत करने की जरूरत है? ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब पुलिस की आगे की कार्रवाई और जांच से ही सामने आएगा।
रामदयालगंज की घटना ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि जौनपुर में अपराधियों के बीच कानून का खौफ कैसे और अधिक प्रभावी बनाया जाए। फिलहाल जिले की जनता पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ ऐसी व्यवस्था की उम्मीद कर रही है, जिससे अपराध होने के बाद कार्रवाई के बजाय अपराध को पहले ही रोकने में पुलिस अधिक सफल हो सके।





