45 से अधिक बीज कंपनियों के 80 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा, किसानों तक उन्नत किस्मों के बीज पहुंचाने पर जोर
राजातालाब (वाराणसी)। आराजी लाइन विकासखंड के शाहंशाहपुर स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईआईवीआर) में भिंडी, लोबिया एवं कुकुरबिट्स प्रौद्योगिकी दिवस-2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश की 45 से अधिक प्रतिष्ठित बीज कंपनियों और कृषि-व्यवसाय संगठनों के 80 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य संस्थान की ओर से विकसित उन्नत सब्जी प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन करने के साथ उद्योग जगत के सहयोग से अनुसंधान को बढ़ावा देना तथा किसानों की जरूरतों के अनुरूप तकनीकों का विस्तार करना रहा।
संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए अनुसंधान उपलब्धियों और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान की सार्थकता तभी है, जब प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीक किसानों के खेतों तक पहुंचे और इससे उनकी उत्पादकता एवं आय में वृद्धि हो। उन्होंने उन्नत कृषि तकनीकों के व्यापक प्रसार के लिए अनुसंधान संस्थानों और उद्योग जगत के बीच निरंतर संवाद तथा साझेदारी को आवश्यक बताया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण 10 उन्नत सब्जी प्रौद्योगिकियों के लाइसेंसिंग समझौतों पर हस्ताक्षर रहा। इंडो यूएस बायो-टेक लिमिटेड, अहमदाबाद के साथ आठ प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण के लिए समझौता किया गया। इनमें टमाटर की काशी आदर्श, गाजर की काशी अरुण, कद्दू की काशी बसंत, इंडियन बीन की काशी बौनी सेम-3, लोबिया की काशी कंचन, खीरा संकर काशी नूतन, मिर्च संकर काशी सुर्ख और बैंगन संकर काशी उत्सव शामिल हैं। कंपनी की ओर से समर्थ पटेल ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
अन्य दो प्रौद्योगिकियों के लिए भी लाइसेंसिंग समझौते किए गए। एग्रोविन एग्री सॉल्यूशन, बेगूसराय के साथ मटर की काशी पूर्वी तथा देवा सीड्स, जालौन के साथ मटर की काशी उदय के लिए समझौता हुआ। इन समझौतों पर क्रमशः उत्पल कुमार और लक्ष्मण गुर्जर ने हस्ताक्षर किए।
संस्थान की ओर से विकसित इन उन्नत प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण से किसानों तक गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों और कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भविष्य में अनुसंधान की प्राथमिकताओं तथा कृषि क्षेत्र की आवश्यकताओं पर भी विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. इंदिवर प्रसाद ने किया।




