अभिभावक संगोष्ठी में बोले डॉ. एन.पी. सिंह—संस्कारयुक्त शिक्षा समय की आवश्यकता
रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
चौबेपुर (वाराणसी)। चौबेपुर खेल मैदान में शनिवार को “आधुनिक शिक्षा में भारतीय ज्ञान एवं परंपरा का समन्वय” विषयक अभिभावक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारतीय शिक्षा बोर्ड (BSB) के गठन और उसके उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्य वक्ता पूर्व आईपीएस एवं भारतीय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. एन.पी. सिंह ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय शिक्षा बोर्ड का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि आने वाला समय एआई आधारित तकनीक का है और भारत को इस क्षेत्र में अग्रणी बनने के लिए अपनी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना होगा। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि यदि हम अपनी शिक्षा और विचारधारा में आत्मनिर्भर नहीं बने तो अन्य देश हमसे काफी आगे निकल जाएंगे।
डॉ. सिंह ने भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत विश्व में सम्मानित है और संस्कृत को विश्व की प्रमुख भाषाओं की जननी माना जाता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में भारतीय मूल्यों और आधुनिक तकनीक का संतुलित समन्वय आवश्यक है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में संस्कारयुक्त शिक्षा की विशेष आवश्यकता है, जो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक होगी। भारतीय शिक्षा बोर्ड के माध्यम से गांव स्तर तक गुणवत्तापूर्ण और संस्कारित शिक्षा पहुंचाने का प्रयास सराहनीय है।
संगोष्ठी में क्षेत्र के आठ मान्यता प्राप्त विद्यालयों के छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में चंद्रशेखर तिवारी, कुमुद उपाध्याय, मनीष मौर्य, अमितेश तिवारी सहित कई विद्यालयों के प्रबंधक, दी एलिट इंग्लिश स्कूल चौबेपुर के प्रधानाचार्य, अन्य प्रधानाचार्य, शिक्षकगण एवं अभिभावक शामिल हुए। इस अवसर पर विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया।




