डीएम की अध्यक्षता में शुल्क नियामक समिति की बैठक, पारदर्शिता अनिवार्य; अभिभावकों की शिकायत के लिए कंट्रोल रूम स्थापित
वाराणसी। जनपद में निजी स्ववित्तपोषित विद्यालयों की मनमानी पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार की अध्यक्षता में आयोजित जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक में फीस वृद्धि, यूनिफॉर्म और पुस्तकों को लेकर मिल रही शिकायतों पर विस्तार से चर्चा की गई और कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 के सभी प्रावधानों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निजी विद्यालयों द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने और अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने पर कड़ी नाराजगी जताई।
जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि निर्धारित सीमा से अधिक शुल्क वृद्धि करने वाले विद्यालयों के खिलाफ जुर्माने सहित कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। समिति ने यह भी निर्णय लिया कि सभी निजी विद्यालयों को पिछले तीन शैक्षणिक वर्षों की शुल्क संरचना तथा ऑडिटेड वित्तीय विवरण अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करने होंगे, ताकि शुल्क वृद्धि की वैधता की जांच की जा सके।
बैठक में पारदर्शिता पर विशेष जोर देते हुए निर्देश दिए गए कि विद्यालय अभिभावकों को शुल्क से संबंधित पूरी जानकारी उपलब्ध कराएं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी भी छात्र को पुस्तकें, जूते, मोजे या यूनिफॉर्म किसी विशेष दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इसके अतिरिक्त, पांच शैक्षणिक वर्षों के भीतर स्कूल यूनिफॉर्म में बदलाव पर रोक रहेगी।
विद्यालयों को यह प्रमाणित करना होगा कि उनकी शुल्क वृद्धि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के अनुरूप तथा निर्धारित 5 प्रतिशत सीमा के भीतर है।
अभिभावकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में कंट्रोल रूम (05422509413) स्थापित किया गया है, जहां फोन या लिखित माध्यम से शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विद्यालयों का नियमित औचक निरीक्षण किया जाए तथा मौके पर अभिभावकों और छात्रों से फीडबैक लिया जाए। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक, चार्टर्ड अकाउंटेंट, मुख्य कोषाधिकारी, विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य एवं अभिभावक-शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों सहित समिति के सभी सदस्य उपस्थित रहे।




