केसरिया ध्वज-पताकाओं से गूंजा क्षेत्र, गोमती तट से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच निकली भव्य शोभायात्रा
रिपोर्ट : विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
SHREE 7NEWS, चौबेपुर (वाराणसी)। चौबेपुर क्षेत्र के धौरहरा-हरिहरपुर स्थित माँ काली मंदिर प्रांगण में आयोजित नौ दिवसीय शतचंडी महायज्ञ का शुभारंभ बुधवार को भव्य कलश यात्रा के साथ श्रद्धा एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में हुआ। धार्मिक अनुष्ठान में लगभग 1100 महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर गाजे-बाजे और केसरिया ध्वज-पताकाओं के साथ विशाल शोभायात्रा निकाली।
प्रातःकाल श्रद्धालु महिलाएं गोमती नदी तट पहुँचीं, जहाँ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच नदी का पूजन, आरती एवं जलाभिषेक किया गया। इसके उपरांत कलशों में पवित्र जल भरकर श्रद्धालुओं ने सिर पर धारण किया और हरिहरपुर, धौरहरा, पुरापार तथा कस्बा धौरहरा सहित विभिन्न मार्गों से होते हुए भव्य कलश यात्रा यज्ञ स्थल पहुँची।
यज्ञ स्थल पर आचार्यों द्वारा विधि-विधान से मंडप पूजन, मंडप प्रवेश, देव पूजन, आरणी मंथन एवं हवन के साथ शतचंडी महायज्ञ का शुभारंभ कराया गया। इस महायज्ञ का संचालन अयोध्या से पधारे पूज्य श्री योगी रामानंद दास जी महाराज के सान्निध्य में संपन्न हो रहा है।
आयोजकों ने बताया कि 24 जून से प्रारंभ हुआ महायज्ञ 30 जून को पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा, जबकि 1 जुलाई को आयोजित विशाल भंडारे में लगभग एक लाख श्रद्धालुओं को प्रसाद ग्रहण कराया जाएगा। महायज्ञ के दौरान विश्व शांति, मानव कल्याण एवं सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए विशेष वैदिक आहुतियाँ अर्पित की जाएंगी।
आयोजन समिति के अनुसार श्रद्धालुओं के बीच एक लाख रुद्राक्ष का निःशुल्क वितरण भी किया जाएगा। महायज्ञ के दौरान प्रतिदिन धार्मिक प्रवचन, भजन-कीर्तन, वैदिक अनुष्ठान एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। संतों ने अपने संबोधन में कहा कि मानव जीवन में पंचतत्वों की शुद्धि एवं आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व है और यही जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करती है।




