वाराणसी पुलिस ने ब्लाइंड मर्डर का किया खुलासा, पांच आरोपी गिरफ्तार; साइबर अपराध के लिए हत्या की सनसनीखेज वारदात ने बढ़ाई चिंता
रिपोर्ट: विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
SHREE 7NEWS, वाराणसी। रोहनिया थाना क्षेत्र के अवलेशपुर (अखरी) में एक किराना व्यापारी की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने साइबर अपराध के बदलते स्वरूप को उजागर कर दिया है। पुलिस के अनुसार, साइबर ठगों के एक संगठित गिरोह ने व्यापारी की हत्या कर उसका मोबाइल हासिल करने और बैंक खाते से 26 लाख रुपये उड़ाने की साजिश रची थी। समय रहते पुलिस की कार्रवाई से आरोपियों की योजना नाकाम हो गई।
मृतक जितेंद्र पटेल (45) रोज की तरह दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में बाइक सवार दो बदमाशों ने उन्हें घेर लिया और गोली मार दी। गोली उनकी पीठ में लगी। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद वह किसी तरह घर पहुंचे और परिजनों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद उन्हें तत्काल बीएचयू ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
प्रारंभिक जांच में मामला ब्लाइंड मर्डर प्रतीत हो रहा था, लेकिन पुलिस की गहन पड़ताल में हत्या के पीछे साइबर अपराध का चौंकाने वाला मकसद सामने आया। जांच में पता चला कि हाल ही में जितेंद्र पटेल के बैंक खाते में 26 लाख रुपये जमा हुए थे। इसी रकम पर साइबर ठगों की नजर थी। आरोपियों की योजना व्यापारी की हत्या कर उसका मोबाइल अपने कब्जे में लेना और बैंक संबंधी जानकारी हासिल कर पूरी रकम ऑनलाइन ट्रांसफर करने की थी।
इस जघन्य वारदात के खुलासे में वाराणसी पुलिस ने तकनीकी जांच और साक्ष्यों के आधार पर महत्वपूर्ण सफलता हासिल की। डीसीपी वरुणा प्रमोद कुमार, एडीसीपी वरुणा लिपि नागायच के पर्यवेक्षण तथा एसीपी रोहनियां अवधेश विश्वकर्मा के निर्देशन में रोहनिया थाना प्रभारी राजू सिंह और एसओजी प्रभारी गौरव सिंह की टीम ने लगातार अभियान चलाया।
जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और तकनीकी सर्विलांस की मदद से आरोपियों तक पहुंच बनाई। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरफ्तार आरोपी पहले भी साइबर ठगी के कई मामलों में सक्रिय रहे हैं और ऑनलाइन माध्यम से लोगों के खातों से लाखों रुपये की धोखाधड़ी कर चुके हैं।
पुलिस ने मुठभेड़ के बाद दो आरोपियों, गोलू पटेल और गियांशु पटेल, को गिरफ्तार किया। मुठभेड़ के दौरान दोनों के पैर में गोली लगी। इनके अलावा गिरोह के कथित मास्टरमाइंड आयुष पटेल तथा सहयोगी मनीष सिंह और अमन सेठ को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपियों के कब्जे से हथियार, मोबाइल फोन और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
यह घटना संकेत देती है कि साइबर अपराध अब केवल ऑनलाइन ठगी तक सीमित नहीं रह गया है। बैंक खातों में बड़ी रकम रखने वाले लोगों को निशाना बनाने के लिए अपराधी अब हिंसक वारदातों से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा के साथ-साथ व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर भी सतर्क रहने की आवश्यकता है।




