डब्लूपीपीएस कॉन्क्लेव-2026 में देशभर के विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और उद्योग प्रतिनिधियों ने साझा किए विचार, किसानों से उपभोक्ता तक मजबूत तंत्र विकसित करने पर दिया जोर
रिपोर्ट : विवेक राय
वाराणसी। देश के गेहूं, आटा एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से जुड़े प्रमुख विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं और उद्यमियों का राष्ट्रीय सम्मेलन डब्लूपीपीएस कॉन्क्लेव-2026 शुक्रवार को होटल ताज, वाराणसी में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। व्हीट प्रोडक्ट प्रमोशन सोसाइटी ऑफ इंडिया (WPPS) एवं उत्तर प्रदेश रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में गेहूं की संपूर्ण वैल्यू चेन को अधिक प्रतिस्पर्धी, टिकाऊ और आधुनिक बनाने पर व्यापक मंथन हुआ।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार, भारत सरकार, कृषि वैज्ञानिकों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, फ्लोर मिलिंग, बेकरी उद्योग तथा देश के 21 से अधिक राज्यों और 80 से अधिक शहरों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने किसानों से लेकर उपभोक्ताओं तक की संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला को तकनीकी रूप से सशक्त और वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज सिंह (आईएएस) रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में कृषि विशेषज्ञ डॉ. रमेश चंद्र (पूर्व सदस्य, नीति आयोग), आईटीसी के सोमनाथ चटर्जी, अजय गोयल सहित कृषि एवं वैश्विक बाजार से जुड़े अनेक विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक कुमार बजाज ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य होने के साथ-साथ रोलर फ्लोर मिलिंग उद्योग का भी प्रमुख केंद्र है। प्रदेश की फ्लोर मिलें किसानों, व्यापारियों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और उपभोक्ताओं के बीच मजबूत सेतु का कार्य कर रही हैं तथा लाखों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध करा रही हैं।
उन्होंने कहा कि यदि भारत को वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अग्रणी बनाना है तो गेहूं की गुणवत्ता, वैज्ञानिक भंडारण, आधुनिक मिलिंग तकनीक, वैल्यू एडिशन, ब्रांडिंग तथा निर्यातोन्मुख नीतियों पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने सरकार से स्टॉक नीति एवं ओपन मार्केट सेल स्कीम जैसी व्यवस्थाओं में समयबद्ध सुधार तथा उद्योग के लिए स्थिर एवं अनुकूल नीतियां लागू करने का आग्रह किया।
मुख्य अतिथि मनोज सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार कृषि आधारित उद्योगों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार बेहतर अधोसंरचना, निवेश अनुकूल वातावरण और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों, उद्योग और सरकार के बीच मजबूत समन्वय से उत्तर प्रदेश कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में राष्ट्रीय नेतृत्व को और अधिक मजबूत करेगा।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. रमेश चंद्र ने कहा कि भविष्य की खाद्य सुरक्षा केवल उत्पादन बढ़ाने से नहीं, बल्कि गुणवत्ता सुधार, वैज्ञानिक अनुसंधान, जलवायु अनुकूल खेती और मजबूत वैल्यू चेन से सुनिश्चित होगी। किसानों की आय बढ़ाने के लिए उत्पादन के साथ-साथ वैल्यू एडिशन पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।
अजय गोयल ने कहा कि भारतीय फ्लोर मिलिंग एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए यह वैश्विक अवसरों का समय है। यदि गुणवत्ता, खाद्य सुरक्षा मानकों और आधुनिक तकनीकों को प्राथमिकता दी जाए तो भारतीय उद्योग अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर सकता है।
सम्मेलन का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि किसानों, सरकार, उद्योग और शोध संस्थानों के संयुक्त प्रयासों से भारत का गेहूं एवं फ्लोर मिलिंग उद्योग नई उपलब्धियां हासिल करेगा तथा ‘विकसित भारत’ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कार्यक्रम में आदि नारायण गुप्ता, प्रमोद वैश्य, मनोज बजाज, आकाश वात्स्यायन, प्रमोद राय, श्याम सुंदर बाजोरिया, विजय झा, मनीष अग्रवाल, आयुष्मान बंसल, मैकडोनाल्ड, सीसर सॉस, आईटीसी के गौरव आनंद सहित अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रतिनिधि तथा देशभर से आए उद्योगपति एवं उद्यमी उपस्थित रहे।




