झूठे मुकदमे से बरी होने के बाद पत्रकार ने उठाया कानूनी कदम, चौबेपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत 10 पर मानहानि का वाद

उच्च न्यायालय से एफआईआर निरस्त होने के बाद सामाजिक प्रतिष्ठा को क्षति का हवाला, दीवानी न्यायालय में दायर किया मुकदमा

 

रिपोर्ट : विरेंद्र प्रताप उपाध्याय

चौबेपुर (वाराणसी)। जौनपुर के पत्रकार महर्षि कुमार सेठ ने अपने विरुद्ध दर्ज दुष्कर्म एवं अन्य गंभीर धाराओं के मुकदमे को उच्च न्यायालय द्वारा निरस्त किए जाने के बाद सामाजिक प्रतिष्ठा और पत्रकारिता की साख को हुई कथित क्षति का हवाला देते हुए बड़ा कानूनी कदम उठाया है। उन्होंने जौनपुर की दीवानी न्यायालय में मानहानि का वाद दायर किया है। इस वाद में चौबेपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष जगदीश कुशवाहा सहित कुल 10 लोगों को प्रतिवादी बनाया गया है।

 

वाद में आरोप लगाया गया है कि पारिवारिक विवाद और रंजिश के चलते सुनियोजित षड्यंत्र के तहत पत्रकार महर्षि कुमार सेठ, उनकी पत्नी श्वेता सोनी, भाई आदेश सेठ तथा बहनोई राजेंद्र स्वर्णकार को दुष्कर्म, दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा जैसे गंभीर मामलों में झूठा फंसाया गया। याचिका में यह भी कहा गया है कि न्यायालय द्वारा जांच के बाद कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद तत्कालीन थानाध्यक्ष ने बिना समुचित जांच किए मुकदमा दर्ज कर लिया।

 

पत्रकार के अनुसार, 6 जनवरी 2025 की शाम तत्कालीन थानाध्यक्ष पुलिस बल के साथ उनके कार्यालय पहुंचे और पूछताछ के नाम पर उन्हें थाने ले गए। इसके बाद उनके विरुद्ध गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। लगभग 22 दिन बाद वाराणसी के जिला एवं सत्र न्यायालय से उन्हें जमानत प्राप्त हुई।

 

इसी प्रकरण में पत्रकार के भाई आदेश सेठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के उपरांत उच्च न्यायालय ने उपलब्ध अभिलेखों एवं साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए 10 मार्च 2026 को संबंधित एफआईआर निरस्त कर दी।

 

अब एफआईआर निरस्त होने के बाद पत्रकार महर्षि कुमार सेठ ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए दावा किया है कि झूठे मुकदमे के कारण उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा, व्यक्तिगत छवि और पत्रकारिता की विश्वसनीयता को गंभीर क्षति पहुंची है। उन्होंने संबंधित प्रतिवादियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई एवं मानहानि की भरपाई की मांग की है। मामले की सुनवाई अब दीवानी न्यायालय में विचाराधीन है।

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