ऋषिकाओं के वैदिक मंत्रोच्चार से आध्यात्मिक वातावरण हुआ आलोकित, आचार्य संजीवनी जी ने कराया लोकमंगल यज्ञ; युवा कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुति को मिली सराहना
रिपोर्ट : विवेक राय
वाराणसी। सुबह-ए-बनारस के मंच पर रविवार प्रातः आयोजित कार्यक्रम में आध्यात्मिकता, वैदिक परंपरा और भारतीय शास्त्रीय संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। मेघों की गर्जना के बीच सुबह-ए-बनारस की ऋषिकाओं द्वारा किए गए वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा परिसर भक्तिमय एवं आध्यात्मिक वातावरण में सराबोर हो गया। इस अवसर पर आचार्य संजीवनी जी ने विश्व कल्याण एवं लोकमंगल की भावना से वैदिक विधि-विधान के साथ यज्ञ संपन्न कराया।
कार्यक्रम के सांस्कृतिक सत्र में युवा सितार वादक रोनित चटर्जी ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके साथ तबले पर जापान के कलाकार हीमोरू मत्सुदा तथा बनारस के कृष्णा प्रजापति ने प्रभावशाली संगति प्रस्तुत की।
सितार वादन की शुरुआत राग भैरव के आलाप और जोड़ से हुई। इसके बाद विलंबित तीनताल में निबद्ध स्वर-रचना तथा द्रुत तीनताल की आकर्षक प्रस्तुति ने श्रोताओं का मन मोह लिया। कार्यक्रम का समापन दादरा की मधुर प्रस्तुति “बांध के पिरितिया के डोर” से हुआ, जिसे उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा।
कार्यक्रम के अंत में समाजसेवी एवं युवा उद्यमी डॉ. कुमार प्रशांत मिश्रा ने कलाकार रोनित चटर्जी को उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर सुबह-ए-बनारस के संस्थापक सचिव डॉ. रत्नेश वर्मा ने सभी अतिथियों एवं कलाकारों का स्वागत करते हुए शुभाशीष प्रदान किया। कार्यक्रम का सफल संचालन संस्था के उपाध्यक्ष पं. प्रमोद कुमार मिश्रा ने किया।
आध्यात्मिक अनुष्ठान, वैदिक परंपरा और शास्त्रीय संगीत के त्रिवेणी संगम ने सुबह-ए-बनारस की गरिमा को और अधिक ऊंचाई प्रदान करते हुए उपस्थित श्रद्धालुओं और संगीत प्रेमियों को अविस्मरणीय अनुभव दिया।




