‘सुबह-ए-बनारस’ कार्यक्रम के अंतर्गत आनंद कानन कला गुरुकुल के कलाकारों ने ‘गंगा अवतरण’ नृत्य-नाटिका से बिखेरा भारतीय संस्कृति का अनुपम सौंदर्य
रिपोर्ट: विवेक राय
वाराणसी। वाराणसी जिला प्रशासन की अभिनव पहल ‘सुबह-ए-बनारस’ के अंतर्गत आयोजित ‘घाट संध्या’ कार्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की गरिमा और सांस्कृतिक वैभव का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर आनंद कानन कला गुरुकुल, वाराणसी की गुरु डॉ. दिव्या श्रीवास्तव के निर्देशन में उनकी शिष्याओं ने भरतनाट्यम की मनोहारी प्रस्तुतियों से उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक पुष्पांजलि से हुआ, जिसके बाद कलाकारों ने अलारिपु एवं नरसिंह स्तुति की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर भारतीय शास्त्रीय नृत्य की उत्कृष्टता का परिचय दिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भरतनाट्यम शैली पर आधारित नृत्य-नाटिका ‘गंगा अवतरण’ रही, जिसमें मां गंगा के दिव्य अवतरण की पौराणिक कथा को भावपूर्ण अभिनय, सशक्त अभिव्यक्ति, लय, ताल और शास्त्रीय नृत्य की सुंदर भंगिमाओं के माध्यम से सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया।
इस प्रस्तुति में शांभवी मेहतो, स्वरात्मिका शुक्ला, सृष्टि मौर्य, अक्षिता भूटानी, ईशान्वी शंकर, ईशान्वी सिंह, मिश्का अग्रवाल, पहल सेवारमही, अन्वी, शरण्या त्रिपाठी एवं प्रिशा अग्रवाल ने अपनी आकर्षक प्रस्तुतियों से दर्शकों की भरपूर सराहना प्राप्त की। कलाकारों ने भाव, मुद्रा, पद संचालन और तालमेल का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
कार्यक्रम के समापन पर रवि शंकर शर्मा (अध्यक्ष, जीत होम सोसाइटी), प्रदीप कुमार श्रीवास्तव (विद्युत इंजीनियर, भारतीय रेल), कन्हैया लाल श्रीवास्तव (कैप्टन, भारतीय नौसेना) तथा विनोद कुमार सिंह (विद्युत इंजीनियर, भारतीय रेल, हाजीपुर) ने सभी प्रतिभागी कलाकारों को प्रमाण-पत्र एवं आशीर्वचन प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम का सफल संयोजन ‘सुबह-ए-बनारस’ के संस्थापक एवं सचिव डॉ. रत्नेश वर्मा ने किया, जबकि मंच संचालन डॉ. उत्कर्ष केशरी ने प्रभावशाली ढंग से किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए भारतीय शास्त्रीय कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की इस पहल को सराहनीय बताया।




