दशाश्वमेध घाट पर दिखा आस्था, राष्ट्रभक्ति और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत संगम; कांवरियों ने लिया जल बचाने का संकल्प
रिपोर्ट विवेक राय
वाराणसी। सावन माह की पावन बेला में शिवभक्ति से सराबोर कांवड़ यात्रा इस बार सामाजिक जागरूकता का भी सशक्त माध्यम बनकर उभरी। शनिवार को दशाश्वमेध घाट से निकले कांवरियों ने कंधों पर गंगाजल से भरी कांवर और हाथों में तिरंगा लेकर न केवल भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट की, बल्कि जल संरक्षण और राष्ट्रप्रेम का प्रेरक संदेश भी जन-जन तक पहुंचाया।
कांवड़ यात्रा के दौरान “हर-हर महादेव”, “बम-बम भोले” और “भारत माता की जय” के गगनभेदी उद्घोषों से पूरा वातावरण भक्तिमय और देशभक्ति के रंग में रंग गया। श्रद्धालुओं ने लोगों से जल का संरक्षण करने तथा प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।
नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक एवं नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला के आह्वान पर निकली इस विशेष कांवड़ यात्रा में श्रद्धालुओं ने जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शिवभक्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रभक्ति का यह समन्वय समाज को नई दिशा देने वाला है। यदि प्रत्येक नागरिक जल बचाने का संकल्प ले, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
राजेश शुक्ला ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक संदेश देने का भी सशक्त मंच है। जल संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति जागरूकता आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। कांवड़ियों ने अपने व्यवहार से यह संदेश दिया कि प्रकृति की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।
इस अवसर पर राजेश शुक्ला, अभिनव सिंह, नकुल पाण्डेय सहित सैकड़ों कांवरियों ने उत्साहपूर्वक यात्रा में सहभागिता की और जल संरक्षण, स्वच्छता तथा राष्ट्रप्रेम का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।




