आचार्य सीताराम चतुर्वेदी महिला महाविद्यालय में छह दिवसीय शिक्षक उन्मुखीकरण कार्यक्रम के तीसरे दिन डिजिटल शिक्षण तकनीकों पर हुई चर्चा
रिपोर्ट: विवेक राय
वाराणसी। आचार्य सीताराम चतुर्वेदी महिला महाविद्यालय, डोमरी, रामनगर में आयोजित छह दिवसीय टीचर्स ओरिएंटेशन प्रोग्राम के तीसरे दिन शिक्षक-शिक्षिकाओं को आधुनिक शिक्षण व्यवस्था में ई-कंटेंट के महत्व, निर्माण और प्रभावी उपयोग की जानकारी दी गई। विशेषज्ञ ने डिजिटल माध्यमों को अपनाकर शिक्षण प्रक्रिया को अधिक सरल, रोचक और विद्यार्थियों के अनुकूल बनाने के विभिन्न तरीकों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय की निदेशक एवं कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. कल्पलता पाण्डेय के मार्गदर्शन में हुआ। मुख्य वक्ता के रूप में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के मनोविज्ञान विभाग के डॉ. मुकेश कुमार पंत ने सहभागिता की।
डिजिटल सामग्री से आसान होगी विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया
डॉ. मुकेश कुमार पंत ने ‘ई-कंटेंट (शैक्षणिक सामग्री)’ विषय पर शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में तकनीक का उचित उपयोग शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने ई-कंटेंट तैयार करने की प्रक्रिया, उसके विभिन्न माध्यमों तथा कक्षा शिक्षण में उसके व्यावहारिक उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शैक्षणिक सामग्री विद्यार्थियों को विषयवस्तु को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती है। इसके माध्यम से शिक्षण को अधिक रोचक, संवादात्मक और विद्यार्थी-केंद्रित बनाया जा सकता है।
तकनीक आधारित शिक्षण समय की आवश्यकता : प्रो. कल्पलता पाण्डेय
महाविद्यालय की निदेशक प्रो. कल्पलता पाण्डेय ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि बदलते शैक्षणिक परिवेश में तकनीक आधारित शिक्षण को अपनाना समय की आवश्यकता है। ई-कंटेंट के माध्यम से जटिल विषयों को भी विद्यार्थियों के सामने सरल, सहज और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है।
उन्होंने शिक्षक-शिक्षिकाओं से डिजिटल संसाधनों का रचनात्मक और प्रभावी उपयोग करने का आह्वान किया।
शिक्षकों ने विशेषज्ञ के सुझावों को बताया उपयोगी
कार्यक्रम का संचालन सुश्री अंजली विश्वकर्मा ने किया। अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत डॉ. प्रतिमा राय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सुश्री वैशाली पाण्डेय ने किया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सक्रिय सहभागिता की। प्रतिभागियों ने ई-कंटेंट के निर्माण और उपयोग से संबंधित विशेषज्ञ के सुझावों को वर्तमान शिक्षण व्यवस्था के लिए उपयोगी बताया। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों को तकनीक के माध्यम से शिक्षण को अधिक प्रभावशाली बनाने के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी भी दी गई।




