शिक्षा, वैदिक गणित और तार्किक चिंतन को लेकर हुआ सार्थक संवाद
बरेली। साहित्य, शिक्षा और बौद्धिक विमर्श के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुके विश्व रिकॉर्डधारी एवं सुप्रसिद्ध साहित्यकार अर्पित सर्वेश इन दिनों बरेली जनपद के दौरे पर हैं। इसी क्रम में उनकी मुलाकात जिले के सुप्रसिद्ध शिक्षक एवं वैदिक गणित के पुरोधा डी.एन. मिश्रा से हुई। दोनों के बीच हुई इस विशेष भेंट में शिक्षा, गणितीय चिंतन और विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता के विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
डी.एन. मिश्रा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विद्या भारती एवं प्राथमिक शिक्षक संघ से जुड़े शैक्षिक कार्यों के लिए जाने जाते हैं। वैदिक गणित के प्रचार-प्रसार के साथ वे विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने तथा उनमें गणितीय एवं तार्किक क्षमता विकसित करने के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। वे ‘प्रतियोगिता गणित’ तथा ‘प्रतियोगिता तर्कशक्ति’ जैसी पुस्तकों के लेखक हैं।
मुलाकात के दौरान अर्पित सर्वेश और डी.एन. मिश्रा ने इस विषय पर विचार-विमर्श किया कि विद्यार्थियों के बीच गणित को केवल एक विषय के रूप में न देखकर तार्किक सोच, समस्या-समाधान क्षमता और बौद्धिक विकास के प्रभावी माध्यम के रूप में कैसे प्रस्तुत किया जा सकता है।
दोनों ने वैदिक गणित की पारंपरिक विधियों और आधुनिक शिक्षा पद्धतियों के बीच बेहतर समन्वय की संभावनाओं पर भी सार्थक चर्चा की।
इस अवसर पर अर्पित सर्वेश ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा में गणित और तर्कशास्त्र की अत्यंत समृद्ध विरासत रही है। आवश्यकता इस बात की है कि इस विरासत को आधुनिक शिक्षा और नई पीढ़ी की आवश्यकताओं से जोड़ा जाए।
उन्होंने विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि पैदा करने तथा रचनात्मक और तार्किक चिंतन को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
अर्पित सर्वेश ने डी.एन. मिश्रा के शैक्षिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके ज्ञान, अनुभव और मार्गदर्शन से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बरेली जनपद के लिए यह गौरव की बात है कि यहां डी.एन. मिश्रा जैसे समर्पित शिक्षक और वैदिक गणित के जानकार मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि किसी शिक्षक का वास्तविक योगदान केवल पुस्तकों या कक्षाओं तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह विद्यार्थियों के सोचने, समझने और आगे बढ़ने की दिशा को भी प्रभावित करता है। ऐसे शिक्षकों का अनुभव और मार्गदर्शन आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण धरोहर है।
वहीं, डी.एन. मिश्रा ने अर्पित सर्वेश के साहित्यिक एवं बौद्धिक कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को शिक्षा, साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ना वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि साहित्य और शिक्षा के बीच संवाद समाज में सकारात्मक वैचारिक वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बरेली दौरे के दौरान हुई यह मुलाकात साहित्य, शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा के सुंदर संगम के रूप में सामने आई। दोनों के बीच हुए संवाद ने इस विचार को मजबूती दी कि जब साहित्यिक दृष्टि, शिक्षक का अनुभव और भारतीय ज्ञान परंपरा एक मंच पर आती है, तो नई पीढ़ी के लिए ज्ञान, विचार और संभावनाओं के नए द्वार खुल सकते हैं।






