2021-22 से चुनाव बंद होने से छात्र प्रतिनिधित्व पर सवाल, विद्यार्थियों की समस्याएं प्रशासन तक पहुंचाने में आ रही कठिनाइयां
रिपोर्ट: विवेक राय
वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में शैक्षणिक सत्र 2021-22 से छात्रसंघ चुनाव बंद होने के कारण विद्यार्थियों के प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। छात्रसंघ को विद्यार्थियों की समस्याओं, मांगों और अधिकारों को विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। चुनाव नहीं होने से छात्रों को अपनी बात सामूहिक रूप से रखने और समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी प्रतिनिधित्व मिलने में कठिनाई हो सकती है।
छात्रसंघ के माध्यम से विद्यार्थी प्रवेश, परीक्षा, छात्रावास और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को प्रशासन के सामने उठा सकते हैं। ऐसे में छात्रसंघ की अनुपस्थिति में विद्यार्थियों की आवाज को मजबूती से उठाने वाले प्रतिनिधि की जरूरत महसूस की जा रही है। छात्रों के बीच छात्रसंघ चुनाव की बहाली और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपना प्रतिनिधि चुनने का अवसर देने की मांग का मुद्दा महत्वपूर्ण बन गया है।





