बनारस के संघर्ष समिति पदाधिकारियों ने भेलूपुर में ओ.टी.एस. की सफलता हेतु कर्मचारियों को किया जागरूक, निजीकरण का विरोध जारी

बनारस के संघर्ष समिति पदाधिकारियों ने भेलूपुर में ओ.टी.एस. की सफलता हेतु कर्मचारियों को किया जागरूक, निजीकरण का विरोध जारी

 

वाराणसी। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आवाहन पर, बनारस के बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं ने तीसरे दिन भी काली पट्टी बांधकर बिजली के निजीकरण का विरोध किया। इसके साथ ही संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने भेलूपुर स्थित पावर हाउस में भोजन अवकाश के दौरान कर्मचारियों को ओ.टी.एस. के द्वितीय चरण के बारे में जागरूक किया, जिसे 22 जनवरी तक बढ़ा दिया गया है। इस दौरान पावर हाउस के अभियंता भी उपस्थित रहे।

 

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने निजीकरण हेतु ट्रांजैक्शन कंसलटेंट नियुक्त करने के लिए टेंडर जारी कर दिया है और प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार ने 20 सितंबर 2020 को विद्युत वितरण के निजीकरण हेतु एक स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट का ड्राफ्ट जारी किया था, लेकिन इस ड्राफ्ट को अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है। ऐसे में पॉवर कार्पोरेशन द्वारा निजीकरण हेतु जारी आर एफ पी डॉक्यूमेंट का आधार अवैध है, क्योंकि यह ड्राफ्ट अभी विचाराधीन है और इससे निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना कानूनी रूप से गलत है।

 

संघर्ष समिति ने कहा कि भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट में स्पष्ट लिखा गया है कि यह दस्तावेज़ मंत्रालय के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। ऐसे में इसे आधार बना कर निजीकरण की प्रक्रिया चलाना यह दिखाता है कि निजी घरानों को पहले ही फायदा पहुंचाने के लिए बिडिंग प्रक्रिया तैयार की गई है, जो एक धोखा है।

 

समिति ने यह भी सवाल उठाया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की करोड़ों रुपए की परिसंपत्तियों का मूल्यांकन किए बिना उनकी रिजर्व प्राइस किस आधार पर तय की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन परिसंपत्तियों को कौड़ियों के मोल बेचा जा रहा है और निजी घरानों को एक रुपए की वार्षिक लीज पर जमीन देने की साजिश की जा रही है।

 

संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि बिजली कर्मचारी किसी भी स्थिति में निजीकरण स्वीकार नहीं करेंगे और उनका विरोध जारी रहेगा। इस आंदोलन में सर्वश्री ई. मायाशंकर तिवारी, ई. नरेंद्र वर्मा, विजय सिंह, राजेंद्र सिंह, ई. प्रकाशदेव पाण्डेय, ई. अविनाश कुमार, रामकुमार झा, ई. एस. के. सिंह, रामावतार आदि उपस्थित थे।

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