संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाने का लिया संकल्प, धरोहर संरक्षण सेवा संगठन का स्थापना दिवस सम्पन्न
वाराणसी : धरोहर संरक्षण सेवा संगठन का स्थापना दिवस बुधवार को आयुक्त सभागार में धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर इसे “सनातन विस्तार दिवस” के रूप में आयोजित किया गया, जहां वक्ताओं ने संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता धर्म संघ शिक्षा मंडल के महामंत्री जगजीत सिंह पांडे ने की, जबकि संचालन गौरव मिश्रा ने किया।
वक्ताओं ने कहा कि भारत की आत्मा संस्कृत और सनातन परंपरा में निहित है। प्रमुख संयोजक कृष्णानंद पांडे ने कहा कि जब-जब धर्म कमजोर हुआ है, राष्ट्र को आघात पहुँचा है। इसलिए राष्ट्र की मजबूती के लिए धर्म और संस्कृति को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
संस्कृत राष्ट्रभाषा अभियान के संयोजक डॉ. साकेत शुक्ला ने कहा कि संस्कृत केवल भाषा नहीं, बल्कि भारत की पहचान और गौरव का प्रतीक है। यदि भारत को विश्वगुरु बनाना है तो संस्कृत को राष्ट्रभाषा का दर्जा देना ही होगा।
समारोह में वरिष्ठ कवि शैलेंद्र पांडे, कवि गौरी सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता प्यारेलाल सोनकर, हर्ष पांडेय महाराज, रतन वरिष्ठ और अरविंद पांडे ने भी अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि सनातन संस्कृति के विस्तार के लिए नई पीढ़ी को संस्कृत से जोड़ना होगा, क्योंकि इसके बिना भारतीय संस्कृति अधूरी है।
इस मौके पर धरोहर राष्ट्रीय मासिक पत्रिका का भी विमोचन किया गया। वक्ताओं ने इसे सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण और सनातन विचारधारा के प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
अध्यक्षता कर रहे जगजीत सिंह पांडे ने कहा कि भारतीय संस्कृति की जड़ों में ही राष्ट्र की आत्मा छिपी हुई है। यदि संस्कृत और सनातन परंपरा को भुला दिया गया तो भारत अपनी पहचान खो देगा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे भारतीय संस्कृति और भाषा पर गर्व करें।
अंत में सभी प्रतिभागियों ने संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाने और सनातन संस्कृति के विस्तार के लिए कार्य करने का संकल्प लिया। आयोजन में शहर के अनेक सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक क्षेत्रों से जुड़े लोग मौजूद रहे।




