जयकारों से भक्तिमय हुआ रामलीला मैदान, सजीव अभिनय ने बाँधा समा
रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
चौबेपुर (वाराणसी)। श्रीरामलीला कमेटी चौबेपुर की ओर से चल रहे शारदीय रामलीला महोत्सव के तीसरे दिन रविवार को ताड़का वध की लीला का मंचन हुआ। लीला के आरंभ से अंत तक दर्शक भावविभोर रहे। जब प्रभु श्रीराम ने राक्षसी ताड़का का वध किया तो पूरा मैदान जय श्रीराम के उद्घोष से गूँज उठा। वातावरण भक्तिरस और श्रद्धा से सराबोर हो गया।
मंचन की शुरुआत में महर्षि विश्वामित्र राजा दशरथ के दरबार पहुँचे। उन्होंने दशरथ से ताड़का के आतंक का वर्णन किया और राम-लक्ष्मण को अपने साथ वन ले जाने का निवेदन किया। दशरथ के सहमति देने पर राम और लक्ष्मण गुरु विश्वामित्र के संग वन की ओर प्रस्थान करते हैं।
वन पहुँचने पर दोनों भाइयों का सामना राक्षसी ताड़का से होता है। दर्शक उस समय भावविभोर हो उठे जब भगवान राम ने अपने बाण से ताड़का का वध किया और महर्षि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा की। इस दृश्य के साथ ही रामलीला मैदान जय श्रीराम के नारों से गूँज उठा। श्रद्धालुओं की आँखें भक्ति और आनंद से छलक पड़ीं।
रामलीला में देव चतुर्वेदी ने भगवान राम, आदर्श चौबे ने लक्ष्मण, लोकेश चौबे ने महर्षि विश्वामित्र और गणेशू सेठ ने राजा दशरथ की भूमिका निभाई। सभी कलाकारों के सजीव अभिनय ने लीला को और भी जीवंत बना दिया। दर्शकों ने कलाकारों को तालियों की गड़गड़ाहट से सम्मानित किया।
रामलीला समिति के अध्यक्ष श्याम मोहन गुप्ता ‘बबलू’ के नेतृत्व में सभी पदाधिकारी मंचन की व्यवस्था में जुटे रहे। मैदान में बड़ी संख्या में लीला प्रेमी मौजूद रहे जिन्होंने पूरे आयोजन को सफल बनाया। मंचन के अंत में देर तक जयकारों की गूँज सुनाई देती रही।




