“प्रदेश का चौथा धरोहर स्थल बन सकता है सारनाथ”
वाराणसी : बौद्ध तीर्थ स्थल सारनाथ को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की दिशा में प्रयास तेज हो गए हैं। इसी क्रम में यूनेस्को के पुरातात्विक विशेषज्ञ हबीब रजा ने शुक्रवार को सारनाथ का दौरा किया। उन्होंने ऐतिहासिक महत्व और संरक्षण की स्थिति का बारीकी से आकलन किया।
विशेषज्ञ ने पुरातत्व संग्रहालय में राष्ट्रीय चिह्न के सिंह शीर्ष, उसके शेर, घोड़े और हाथी की मूर्तियों का निरीक्षण किया। साथ ही बोधिसत्व की विशाल प्रतिमा और हिंदू गैलरी में रखी शिव द्वारा अंधकासुर वध की मूर्ति को भी गहनता से देखा और फोटोग्राफी की। करीब दो घंटे तक संग्रहालय में रहकर उन्होंने संरक्षित अवशेषों और स्मारकों की मौजूदा स्थिति का अवलोकन किया।
सारनाथ को विश्व धरोहर में शामिल कराने के लिए पुरातत्व विभाग ने 500 पृष्ठों का विस्तृत डोजियर तैयार किया है। इसमें धमेख स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, चौखंडी स्तूप और संग्रहालय के रख-रखाव की स्थिति सहित पुराने व वर्तमान फोटो तुलनात्मक रूप से शामिल किए गए हैं।
अगर सारनाथ को सूची में शामिल किया जाता है, तो यह प्रदेश का चौथा विश्व धरोहर स्थल होगा। वर्तमान में ताजमहल, आगरा का किला और फतेहपुर सीकरी इस सूची में शामिल हैं।
हबीब रजा के तीन दिवसीय दौरे के दौरान वाराणसी विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन और पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने सारनाथ और आसपास के गांवों में कराए गए विकास कार्यों की जानकारी दी।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय लोगों को भी जोड़ा जा रहा है। इस क्रम में 286 लोगों को कार्ट उपलब्ध कराए गए हैं और उन्हें प्रशिक्षित किया गया है। यह पहल स्थानीय हित और पर्यटन विकास दोनों की दिशा में अहम मानी जा रही है।





