विज्ञान और अध्यात्म का समन्वय ही सच्चा ज्ञान : साध्वी स्वाति भारती
चौबेपुर (वाराणसी)। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से सन-साइन पब्लिक स्कूल, चौबेपुर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस पर श्रद्धा और भक्ति का वातावरण छाया रहा। कथा के दौरान ध्रुव चरित्र, वराह अवतार और नरसिंह अवतार के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया।
सर्वश्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी स्वाति भारती जी ने प्रवचन में कहा कि आज के युग में विज्ञान और अध्यात्म का समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण में “ज्ञानं निःश्रेयसार्थाय पुरुषस्य आत्मदर्शनं” कहा गया है, जबकि श्रीमद्भगवद्गीता में इसे “अध्यात्म ज्ञान नित्यत्वम् तत्वज्ञानार्थ दर्शनं” के रूप में परिभाषित किया गया है।
साध्वी जी ने बताया कि विज्ञान शब्द लैटिन के साइन्टिया शब्द से बना है, जिसकी उत्पत्ति संस्कृत शब्द सांख्य से हुई है, जिसका अर्थ है ‘देखना’ या ‘अनुभव करना’। उन्होंने कहा कि आर्ष ग्रंथों ने इसे परा विद्या कहा है, और गीता इसे राजविद्या अर्थात विद्या की सर्वोच्च विद्या बताती है। यही ब्रह्मज्ञान का सार है।
कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और साध्वी जी के आध्यात्मिक विचारों से लाभान्वित हुए।




