प्रेमचंद मानव मन की परतों को सहजता से उघाड़ते हैं : डॉ. राम सुधार सिंह
वाराणसी। प्रसिद्ध साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद मनुष्य के भीतर बसे दुर्भाव, शक, तिरस्कार और अपवाद जैसे नकारात्मक भावों को अत्यंत सरल और प्रभावी ढंग से उजागर करते हैं। प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ट्रस्ट, लमही द्वारा आयोजित ‘सुनो मैं प्रेमचंद’ कार्यक्रम के 1749वें दिवस पर आयोजित सत्र में यह विचार ट्रस्ट के संरक्षक डॉ. राम सुधार सिंह ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की कथाएँ समाज के यथार्थ, मानवीय संबंधों तथा चरित्रों की मनोवैज्ञानिक गहराइयों को उभारने में अद्वितीय हैं। प्रेमचंद की कहानी ‘कुत्सा’ इसका उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें मनुष्य के भीतर छिपी नकारात्मक प्रवृत्तियों का सजीव चित्रण मिलता है।
कार्यक्रम में कहानी ‘कुत्सा’ का पाठन प्रसिद्ध कवयित्री प्रीति सिंह द्वारा किया गया। इसके बाद ट्रस्ट के संरक्षक डॉ. राम सुधार सिंह, आलोक शिवाजी, डॉ. मनोहर और निदेशक राजीव गोंड ने उनका सम्मान किया।
डॉ. मनोहर ने कहा कि कहानी के पात्र वे लोग हैं जिन्हें दूसरों की बुराई करने और अफवाहें फैलाने की आदत पड़ चुकी होती है। प्रेमचंद बताते हैं कि ऐसी प्रवृत्ति समाज में कलह और भ्रम फैलाती है और अंततः ऐसे लोग स्वयं भी सम्मान खो देते हैं।
कार्यक्रम में राजस्थान के बीकानेर से आए वरिष्ठ साहित्यकार वाचस्पति प्रियम चतुर्वेदी, ध्रुव नारायण, चंदन मौर्य, राहुल यादव, रोहित गुप्ता, विपनेश सिंह, संज ऋषभ सहित बड़ी संख्या में छात्र, साहित्यप्रेमी और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
संचालन प्रांजल श्रीवास्तव ने किया तथा स्वागत राहुल यादव द्वारा किया गया।




