भूली-बिसरी विरासतों और सांस्कृतिक धरोहरों की खोज पर केंद्रित
रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
चौबेपुर (वाराणसी) : सुंगुलपुर गांव के निवासी तथा रेल विभाग से सेवानिवृत्त डी.आर.एम ओम प्रकाश चौबे ने काशी की अनछुई, अनदेखी और उपेक्षित विरासतों पर आधारित नई पुस्तक ‘काशी—एक लघु परिचय’ का लेखन किया है। पुस्तक का शीर्षक ही इसकी अवधारणा को स्पष्ट करता है। लेखक के अनुसार ‘लघु’ का अर्थ केवल संक्षेप नहीं, बल्कि किसी गूढ़ विषय का सार रूप है—जैसे भगवान राम के ‘लघु लक्ष्मण’। काशी की विशालता और गहनता को देखते हुए इसके सारभूत रूप को पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास इस पुस्तक के माध्यम से किया गया है।
ओम प्रकाश चौबे बताते हैं कि काशी के प्रसिद्ध धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी सभी को है, किंतु इसके इर्द-गिर्द बसे अनेक स्थल ऐसे हैं जिनका न तो पर्याप्त दस्तावेजी उल्लेख मिलता है और न ही वे शोध का विषय बन पाए हैं। उन्होंने अपने विस्तृत भ्रमण और वर्षों के अध्ययन के दौरान चंद्रावती जैसे जैन समाज के महत्वपूर्ण तीर्थ, मारकंडेय महादेव स्थित गंगा–गोमती संगम, बलुआ से मारकंडेय महादेव तक फैली नव ऋषियों की तपस्थली तथा अनेक प्राचीन, रहस्यमयी स्थलों का अध्ययन कर उन्हें पुस्तक में स्थान दिया है।
लेखक के अनुसार बनारस केवल घाटों और मंदिरों की नगरी भर नहीं है, बल्कि यहाँ असंख्य प्राचीन कुंड, देवालय, लोक-आस्था केंद्र और सांस्कृतिक स्थलों की समृद्ध परंपरा छिपी है, जो समय के साथ विस्मृति की ओर बढ़ गई है। इन भूले-बिसरे स्थलों को खोजकर पुस्तक में समाहित करना उनका उद्देश्य रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को काशी के वास्तविक सांस्कृतिक स्वरूप और उसकी गहराई का परिचय मिल सके।
ज्ञान, परंपरा और शोध के इस विशिष्ट प्रयास की चौबेपुर क्षेत्र में व्यापक सराहना हो रही है। पुस्तक ‘काशी—एक लघु परिचय’ काशी की विरासत, भूगोल, अध्यात्म और इतिहास को नई दृष्टि से समझने का महत्वपूर्ण दस्तावेज बनकर सामने आई है।




