अधिक यूरिया से बढ़ता है कीट-रोग का खतरा, पर्यावरण भी होता है प्रभावित
रिपोर्ट विरेंद्र प्रताप उपाध्याय
चौबेपुर (वाराणसी)। फसलों में असंतुलित उर्वरकों का प्रयोग किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। इससे पौधों की अत्यधिक वानस्पतिक वृद्धि होकर वे कमजोर व मुलायम हो जाते हैं, जिससे कीट एवं रोगों के संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। किसानों को चाहिए कि वे संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करें। यह सलाह कृषि विभाग की ओर से ढांका गांव में आयोजित दो दिवसीय किसान पाठशाला के दूसरे दिन मास्टर ट्रेनर देवमणि त्रिपाठी ने दी।
उन्होंने बताया कि अधिक मात्रा में यूरिया के उपयोग से नाइट्रस ऑक्साइड गैस का उत्सर्जन होता है, जो वायु, जल और मिट्टी प्रदूषण का कारण बनता है। पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए उर्वरकों का वैज्ञानिक ढंग से उपयोग आवश्यक है।
मास्टर ट्रेनर ने प्रधानमंत्री प्रणाम योजना की जानकारी देते हुए बताया कि योजना के अंतर्गत विगत तीन वर्षों में अनुदानित रासायनिक उर्वरकों की औसत बिक्री की तुलना में यदि खपत कम होती है, तो उससे होने वाली अनुदान बचत का 50 प्रतिशत किसानों के हित में व्यय करने हेतु राज्य सरकार को उपलब्ध कराया जाता है।
उप कृषि निदेशक अमित जायसवाल के निर्देशन में आयोजित किसान पाठशाला के दूसरे दिन कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं, कृषि उत्पादन में एसपीओ की भूमिका तथा कृषि प्रसार में तकनीकी कौशल के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि विनोद निषाद, सरिता देवी, राम अवतार, अमरनाथ पाण्डेय, लक्ष्मीशंकर दुबे, अर्जुन सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।




