संघ शताब्दी वर्ष पर गोरखपुर में कुटुम्ब स्नेह मिलन, परिवार को संस्कारों का प्रथम विद्यालय बताया
गोरखपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में गोरखपुर विभाग द्वारा बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में कुटुम्ब स्नेह मिलन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें महानगर के 20 नगरों, चौरी-चौरा और ग्रामीण क्षेत्र के कार्यकर्ता, विभाग-प्रांत पदाधिकारी, प्रवासी स्वयंसेवक तथा उनके परिवारजन बड़ी संख्या में शामिल हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि परिवार केवल एक छत और चारदीवारी से नहीं बनता, बल्कि अपनत्व के रिश्तों से बनता है। अगली पीढ़ी को सामाजिक बनाने की पहली इकाई कुटुम्ब है, जहां व्यक्ति समाज में रहने की शिक्षा प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि भारत की विशेषता अपनेपन पर आधारित संबंध हैं, जबकि पश्चिमी देशों में संबंध अधिकतर औपचारिक होते हैं।
उन्होंने परिवार को सामाजिक शिक्षा, आर्थिक गतिविधियों और संस्कृति के पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरण का केंद्र बताते हुए कहा कि कुटुम्ब का आधार माता होती है, जो संस्कारों की पहली गुरु है। समाज और राष्ट्र की मजबूती परिवार से ही संभव है। उन्होंने लालबहादुर शास्त्री का उदाहरण देते हुए कहा कि राष्ट्रहित के लिए त्याग की भावना भी परिवार से ही विकसित होती है।
सरसंघचालक ने कहा कि समाज परिवर्तन का मार्ग भी परिवार से होकर जाता है। स्वयंसेवकों को अपने आचरण से उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए और वर्ष में दो-तीन बार कुटुम्ब मिलन आयोजित कर संवाद बढ़ाना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी अपनाने, मातृभाषा के प्रयोग और पारंपरिक जीवनशैली पर भी उन्होंने जोर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ तथा समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ। मंच पर प्रांत संघचालक डॉ. महेंद्र अग्रवाल, विभाग संघचालक शेषनाथ जी उपस्थित रहे। विभाग कार्यवाह संजय जी ने अतिथि परिचय कराया।




