पंचमुखी महादेव का पूजन-अर्चन, भंडारे में श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
प्रयागराज । महाशिवरात्रि एवं माघ मेले की पूर्णाहुति पर गंगा तट पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने स्नान, पूजन और सेवा के माध्यम से सनातन परंपरा की गरिमा को अनुभव किया। इस अवसर पर नमामि गंगे के सह संयोजक काशी प्रांत राजेश शर्मा ने कहा कि गंगा और शिव भारतीय संस्कृति के आधार हैं और इनके माध्यम से समाज में सद्भाव, सेवा और संस्कारों का संदेश प्रसारित होता है।
कार्यक्रम में श्री पंचमुखी महादेव का विधि-विधान से श्रृंगार एवं पूजन हुआ। पंडित दिव्यांश शर्मा ने भव्य आरती संपन्न कराई, जबकि संरक्षक कात्यायनी देवी व श्रीमती रोहिणी ऋषि शर्मा के सहयोग से भंडारे का आयोजन कर श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया। श्रद्धालुओं ने गंगाजल, पंचामृत, बेलपत्र, धतूरा और चंदन अर्पित कर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए भगवान शिव का अभिषेक किया।
पौराणिक मान्यताओं का उल्लेख करते हुए बताया गया कि सृष्टि के आरंभ से ही शिवलिंग पूजन की परंपरा रही है और महाशिवरात्रि की रात्रि में भगवान शिव का विशेष निवास माना जाता है। इसी आस्था के साथ लाखों तीर्थयात्रियों ने संगम स्नान कर आत्मिक शांति का अनुभव किया।
इस अवसर पर धर्मयात्रा महासंघ के पं. शैलेश शुक्ल, गुजरात से आए अजय भाई दवे, हर्षिल गोहिल सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी आध्यात्मिक धरोहर से जुड़ने का अवसर देते हैं और समाज को एकता, सद्भाव व सेवा का संदेश प्रदान करते हैं।





