आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को ₹30 हजार मानदेय देने की मांग, मातृशक्ति पर टिप्पणी को लेकर भी घेरा
लखनऊ । उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को समाजवादी पार्टी की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने महिला एवं बाल विकास विभाग की नीतियों और प्रदेश में बढ़ते कुपोषण व एनीमिया के मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने सदन में आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में 50 प्रतिशत से अधिक बच्चे, गर्भवती महिलाएं और किशोरियां आज भी कुपोषण और एनीमिया से जूझ रही हैं।
सदन में बोलते हुए उन्होंने मातृशक्ति को लेकर की गई टिप्पणी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जहां सत्ता पक्ष महिलाओं के लिए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करता है, वहीं समाजवादी विचारधारा महिलाओं को ‘माँ’ का सम्मान देती है। उन्होंने विभागीय मंत्री से पूछा कि सरकार माताओं और बच्चों की समस्याओं को क्यों नजरअंदाज कर रही है।
महंगाई का मुद्दा उठाते हुए डॉ. सोनकर ने कहा कि चना 80 रुपये किलो और दूध 66 रुपये लीटर होने के बावजूद सरकार एक बच्चे के पोषण के लिए मात्र 8 रुपये और गर्भवती महिला के लिए 9 रुपये का मानक तय किए हुए है। उन्होंने सवाल किया कि इतनी कम राशि में 600 कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन कैसे उपलब्ध कराया जा सकता है।
उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की स्थिति पर भी चिंता जताते हुए कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर बैठने को मजबूर हैं। सरकार से मांग की गई कि उन्हें 30 हजार रुपये मासिक मानदेय, स्थायी नियुक्ति, रिटायरमेंट योजना और स्वास्थ्य बीमा की सुविधा दी जाए।
डॉ. सोनकर ने कहा कि जब तक पोषण बजट को महंगाई के अनुरूप नहीं बढ़ाया जाएगा, तब तक प्रदेश को कुपोषण मुक्त बनाना संभव नहीं





