दो हफ्ते में हलफनामा या पेशी का निर्देश, कब्जे व निर्माण गिराने की भूमिका पर स्पष्टीकरण तलब
रिपोर्ट अभिषेक उपाध्याय
जौनपुर। मुंगराबादशाहपुर थाना के एक उपनिरीक्षक पर जमीन कब्जाने के आरोप को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक जौनपुर को दो सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने या स्वयं उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।
न्यायालय ने पूछा है कि संबंधित प्लॉट, जिसका 3 फरवरी 2018 को याची के पक्ष में बैनामा हुआ था, उस पर वर्तमान में किसका कब्जा है। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि क्या उपनिरीक्षक वीरेंद्र यादव ने निर्माण गिराकर किसी अन्य को कब्जा दिलाने में भूमिका निभाई तथा प्रस्तुत फोटो याची की जमीन का है या बगल की भूमि का।
याची नागेंद्र प्रसाद विश्वकर्मा व अन्य का आरोप है कि पुलिस उपनिरीक्षक उनकी जमीन हड़पना चाहता है और कम कीमत पर बेचने का दबाव बना रहा है। शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने पर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अनुसार 15-20 लोगों ने जबरन निर्माण कर गेट लगाकर कब्जा कर लिया है।
वहीं पुलिस की ओर से दी गई रिपोर्ट में दो पक्षों के बीच जमीन विवाद बताते हुए धारा 170 के तहत कार्रवाई की बात कही गई है। हालांकि न्यायालय ने आरोपों को गंभीर मानते हुए सत्यापन आवश्यक बताया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पारित किया। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

